अवैध वसूली के आरोपी अधीक्षक को बचा रहे कारागार मंत्री!

मुरादाबाद जेल प्रशासन के अवैध वसूली की शिकायत पर अफसरों की चुप्पी मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां

अवैध वसूली के आरोपी अधीक्षक को बचा रहे कारागार मंत्री!
जिला कारागार मुरादाबाद

लखनऊ। अवैध वसूली में लिप्त मुरादाबाद जेल अधीक्षक पर कब कार्रवाई होगी। यह सवाल विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारियों के जेल प्रशासन पर जेल के अंदर बंदियों से की जा रही अवैध वसूली की शिकायत होने के बाद भी कारागार मंत्री समेत शासन और मुख्यालय के आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। जेल विभाग के अफसर मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां उड़ा रहे है।

शासन में मजबूत पकड़ होने से नहीं होती कोई कार्रवाई!
बीते दिनों शासन में सैटिंग गेटिंग से बांदा से मुरादाबाद जेल पहुंचे अधीक्षक ने जेल में लूट मचा रखी है। सूत्रों का कहना है प्रभार संभालने के बाद ही उन्होंने बंदियों से सुविधा देने के नाम पर होने वाली वसूली के दामों में दो से तीन गुना की बेतहाशा बढ़ोत्तरी कर दी। शिकायत के बाद भी इन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि गाजियाबाद से बांदा स्थानांतरित किए गए इस अधीक्षक ने मात्र छह माह के अंतराल के बाद ही शासन में सेटिंग गेटिंग कर अपना तबादला मुरादाबाद जेल पर करा लिया। प्रदेश की सर्वाधिक कमाऊ कही जाने वाली जेल से पूर्व वह लंबे समय तक अलीगढ़ जेल पर तैनात रह चुके है। प्रदेश के पश्चिम के कमाऊ जेलों पर लंबा कार्यकाल बिताने वाले इस अधीक्षक को किसी तरह बांदा भेजा गया था। चंद दिनों रहने के बाद वह फिर कमाऊ मुरादाबाद जेल पहुंच गए। मेरठ जेल में तैनाती के दौरान एक सनसनीखेज घटना के बाद इनके बर्खास्तगी की संस्तुति हुई थी। कार्रवाई होने के बजाए इन्हें दो प्रमोशन भी दे दिए गए। 

मुरादाबाद में अपना दल पार्टी के मंडल पदाधिकारियों ने बीते दिनों जिला प्रशासन और जेल के अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें आरोप लगाया कि जेल में बंदियों से प्रतिदिन पांच से सात लाख रुपए की अवैध वसूली कर कमाई की जा रही है। नाम के पहले अक्षर से (अल्फाबेटिकल) बैरेक में जाने से बचने के लिए बंदियों को मनचाही बैरेक में जाने के लिए 7000 रुपए की मोटी रकम वसूल की जा रही है। इसके साथ ही बैठकी और मशक्कत के नाम पर 4000 रुपए वसूल किए जा रहे है। मुलाकात पर्ची के लिए प्रति व्यक्ति 10 रुपए वसूल किए जा रहे है। जबकि नियमानुसार एक पर्ची पर तीन व्यक्ति निःशुल्क मुलाकात कराए जाने का प्रावधान है।

कारागार मंत्री की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई सुर्खियों में
कारागार मंत्री की पक्षपातपूर्ण कार्यवाही किए जाने का मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। बताया गया है कि गाजीपुर और मुजफ्फरनगर जेल में मोबाइल संचालन का एक जैसा मामला सुर्खियों में आया। कारागार मंत्री के निर्देश पर जेल के अंदर मोबाइल संचालित किए जाने के मामले में गाजीपुर जेल अधीक्षक को तो निलंबित कर दिया गया, जबकि मुजफ्फरनगर जेल में पूर्व विधायक के मोबाइल चलाते पकड़े जाने के बाद पूर्व विधायक की जेल बदलकर मामले को रफा दफा कर दिया गया। अधीक्षक के खिलाफ आजतक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस अधीक्षक को बीते स्थानांतरण सत्र में सिद्धार्थनगर जेल से मुजफ्फरनगर जेल स्थानांतरित किया गया था।

जेल में चल रही कैंटीन अफसरों की कमाई का जरिया बन गई है। कैंटीन की बिक्री में बढ़ाने के लिए जेल में बंदियों को घटिया भोजन परोसा जा रहा है। बंदियों को जो दाल परोसी जा रही है उसमें दाल ढूंढे नहीं मिलती है। रोटियों का तो और ही बुरा हाल हैं। चाय तो ऐसी दी जाती है जिसे जानवर भी देखना पसंद नहीं करते है। कैंटीन में जेल के बाहर आसानी से 15 रुपए में मिलने वाली खाद्य सामग्री को 50 से 60 रुपए में बेचा जा रहा है। जेल में प्रवेश की प्रतिबंधित वस्तुओं की जमकर कालाबाजारी की जा रही है। पान, बीडी, मसाला, सिगरेट, तंबाकू, गांजा, चरस और ब्लेड को अनाप शनाप दामों पर बेचा जा रहा है। शिकायत के बाद भी विभाग के मंत्री समेत अन्य उच्चाधिकारियों ने भ्रष्टाचार के इस गंभीर मसले पर चुप्पी साधकर मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। उधर इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उन्होंने फोन उठना मुनासिब नहीं समझा।