बाजार में उपभोक्ताओं के प्रति सरकार का रुख

उपभोक्ताओं की शिकायतों को हल करने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता अदालतों की स्थापना की गई है। यहाँ उपभोक्ताओं को जल्द और कम खर्च में न्याय मिलता है।

बाजार में उपभोक्ताओं के प्रति सरकार का रुख

देखा जाए तो आज बाजारवाद की प्रवृत्ति बढ़ रही है। भौतिकता की ओर कंपनियों का रूख है। खाद्य पदार्थों में मिलावट, चोर बाजारी, कम तौल, मिथ्या-प्रचार, भ्रामक विज्ञापन, तथ्यों को छिपाकर उपभोक्ताओं के साथ छल किया जा रहा है। छोटी से छोटी वस्तु से लेकर बड़ी वस्तुओं तक की खरीद में किसी प्रकार ठगी या धोखा मिलने पर फोरम का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत यह एक प्रावधान है कि जिन मामलों में उत्पादों के विश्लेषण की आवश्यकता नहीं होती है, उनका निपटान 90 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। हालाँकि, जहाँ उत्पादों के परीक्षण या प्रयोगशाला विश्लेषण की आवश्यकता होती है, वहाँ मामलों को 150 दिनों में निपटाने का प्रावधान है।

इसलिए कोई भी वस्तु खरीदते समय रसीद जरूर रखें । मुकदमें में वह बहुत बड़ा आधार होता है। भारत सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के लिए अनेक संवैधानिक अधिकार प्रदान किए गए हैं, नियम-कानून एवं उपभोक्ता अदालतें बनायी गयी हैं, इसके बावजूद शहर हो या गांव, उपभोक्ताओं का शोषण जारी है। अतः ग्राहकों को और अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है। बहुत कम उपभोक्ता जानते होंगे कि उनके क्या अधिकार हैं। हमारे समाज में अक्सर लोगों द्वारा किसी के ठगे जाने, धोखाधड़ी, गुणों के विपरीत सामान दिए जाने आदि की शिकायतें सुनने को मिलती हैं। इसका प्रमुख कारण, एक तो उपभोक्ताओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी है, दूसरी तरफ वे शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का साहस नहीं जुटा पाते। सरकार ने उपभोक्ताओं को संरक्षण देने के लिए कई क़ानून बनाए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं से पूरी क़ीमत वसूलने के बाद उन्हें सही वस्तुएं और वाजिब सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं आपकी मेहनत की कमाई कहीं पानी की तरह ना बह जाये इसलिए जब आप बाजार में कुछ खरीद रहे होते हैं, तो दरअसल आप अपनी मेहनत के बदले खरीद रहे होते हैं इसलिए आप चाहते हैं कि बाजार में आपको धोखा न मिले। इसके लिए आप पूरी सावधानी बरतते हैं। लेकिन बाजार तो चलता ही मुनाफे पर है। अपना मुनाफा बढ़ाने के चक्कर में दुकानदार, कंपनी, डीलर या सर्विस प्रवाइडर्स आपको धोखा दे सकते हैं। हो सकता है आपको बिल्कुल गलत चीज मिल जाए। या फिर उसमें कोई कमी पेशी हो। अगर ऐसा होता है और कंपनी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है, तो चुप न बैठें। आपकी मदद के लिए कंस्यूमर फोरम मौजूद हैं, वहां शिकायत करें l ये सत्य है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों का संरक्षण जिस देश में होगा, वहां का लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा.

उपभोक्ताओं के अधिकार

  • खरीदी गई वस्तु की गुणवत्ता, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, स्तर और मूल्य, जैसा भी मामला हो, के बारे में जानकारी का अधिकार
  • जीवन एवं संपत्ति के लिए हानिकारक सामान और सेवाओं की बिक्री के खिला़फ सुरक्षा का अधिकार, ताकि उपभोक्ताओं को गलत व्यापार पद्धतियों से बचाया जा सके।
  • जहां तक संभव हो उचित मूल्यों पर विभिन्न प्रकार के सामान तथा सेवाओं तक पहुंच का आश्वासन।
  • उपभोक्ताओं के हितों पर विचार करने के लिए बनाए गए विभिन्न मंचों पर प्रतिनिधित्व का अधिकार।
  • अनुचित व्यापार पद्धतियों या उपभोक्ताओं के शोषण के विरुद्ध निपटान का अधिकार। सूचना संपन्न उपभोक्ता बनने के लिए ज्ञान और कौशल प्राप्त करने का अधिकार।
  • अपने अधिकार के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार l

बढ़ते बाज़ारवाद के दौर में उपभोक्ता संस्कृति तो देखने को मिल रही है, लेकिन उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी हैl

  • बाजार में होने वाली ग्राहक जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावटी सामग्री का वितरण
  • अधि‍क दाम वसूलना, बिना मानक वस्तुओं की बिक्री, ठगी, नाप-तौप में अनियमितता

गारंटी के बाद सर्विस प्रदान नहीं करने के अलावा ग्राहकों के प्रति होने वाले अपराधों को देखते हुए जागरूकता अभि‍यान चलाए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक करना एवं बाजार की गड़बड़ियों और सामाजिक अन्याय के खिलाफ विरोध व्यक्त करना होता है l उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम ने उपभोक्ताओं को अधिकार दिया है कि वे अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाएं l इसी क़ानून का नतीजा है कि अब उपभोक्ता जागरूक हो रहे हैं l इस क़ानून से पहले उपभोक्ता ब़डी कंपनियों के खिला़फ बोलने से गुरेज़ करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है l सरकार ने उपभोक्ता समूहों को आर्थिक सहयोग मुहैया कराने के साथ-साथ अन्य कई तरह की सुविधाएं भी दी हैं l टोल फ्री राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है l देश भर के उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1800-11-4000  डायल कर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए परामर्श ले सकते हैं l उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई “जागो ग्राहक जागो” जैसी मुहिम से भी आम लोगों को उनके अधिकारों के बारे में पता चला है.

1- कैसे करें शिकायत ?

  • हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें: 1800-11-4000 या 1915 डायल करें और एक एजेंट से बात करके अपनी शिकायत बताएं.

    2-ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें:

    • National Consumer Helpline (NCH) की वेबसाइट gov.in पर जाएं
    • एक बार खुद को पंजीकृत करें और यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त करें.
    • अपनी शिकायत और आवश्यक दस्तावेज (यदि कोई हो) संलग्न करें.

    3- अन्य तरीके:

    • NCH APP: ऐप के माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
    • एसएमएस: आप 8800001915 पर एक एसएमएस भेजकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

    4- शिकायत दर्ज करने का समय : यह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन राष्ट्रीय छुट्टियों को छोड़कर सभी दिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक उपलब्ध है.

शिकायत के साथ आपको ऐसे डॉक्युमेंट्स की कॉपी देनी होगी, जो आपकी शिकायत का समर्थन करें। इनमें कैश मेमो, रसीद, अग्रीमेंट्स वैगरह हो सकते हैं। शिकायत की 3 कॉपी जमा करानी होती हैं। इनमें एक कॉपी ऑफिस के लिए और एक विरोधी पार्टी के लिए होती है। शिकायत व्यक्ति अपने वकील के जरिए भी करवा सकता है और खुद भी दायर कर सकता है। शिकायत के साथ पोस्टल ऑर्डर या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए फीस जमा करानी होगी। डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर प्रेजिडंट, डिस्ट्रिक्ट फोरम या स्टेट फोरम के पक्ष में बनेगा। हर मामले के लिए फीस अलग-अलग होती है.

जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, और तय दाम से अधिक वसूली जैसे उपभोक्ता शोषण के विभिन्न तरीकों को पहचानना उपभोक्ता के लिए आवश्यक है।

उपभोक्ता संरक्षण एवं जनजागृति के लिए सघन अभियान गॉवों में चलाये जाने चाहिये साथ ही साथ मिलावट को रोकने के लिए सुदृढ़ नियंत्रण व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है। सरकार को सख्त कानूनी कार्रवाई, आवश्यक वस्तु अधिनियम का प्रभावी प्रवर्तन, और स्टॉक सीमाओं का निर्धारण करना चाहिए l सरकार को ऐसे कानून बनाने और लागू करने चाहिए जो उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार प्रथाओं, दोषपूर्ण उत्पादों और भ्रामक विज्ञापनों से बचा सकें। भारत में, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 इसके लिए आधार प्रदान करता है।

इसके साथ ही, जमाखोरी पर नजर रखने के लिए निगरानी एजेंसियां स्थापित करनी चाहिए और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता पैदा करनी चाहिए कि कैसे अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटा जाए l खाद्य विशलेषक की नियुक्ति कर मिलावट की समस्या से निदान मिल सकता है।

सरकार को चाहिए कि वह उपभोक्ताओं के शोषण को रोकने, उन्हें सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ व सेवाएँ प्रदान करने के लिए नीतियां बनाए और उन्हें लागू करे, धोखाधड़ी से बचाए, उत्पादों के लिए मानक तय करे, उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करे, तथा प्रभावी उपभोक्ता संरक्षण तंत्र स्थापित करे। उपभोक्ता की सजगता एवं जागरूकता से स्वस्थ एवं सुरक्षित देश का निर्माण हो सकता है.

 

सुनीता दोहरे
प्रबंध सम्पादक / इण्डियन हेल्पलाइन न्यूज़
महिला अध्यक्ष / शराबबंदी संघर्ष समिति