अटल के पीएम कार्यकाल का सुशासन आज भी अनुकरणीय
सुशासन-सिंधी संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर हुई संगोष्ठी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के अन्तर्गत गुरुवार को ’’अटल एवं सुशासन-सिंधी संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में’’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया। अकादमी कार्यालय, इन्दिरा भवन में हुए कार्यक्रम में सर्वप्रथम नानक चन्द लखमानी, पूर्व उपाध्यक्ष, उप्र सिंधी अकादमी, दुनीचन्द, सिंधी विद्वान, प्रकाश गोधवानी, डाॅ अनिल चन्दानी तथा कनिका गुरूनानी द्वारा भगवान झूलेलाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम में प्रकाश गोधवानी द्वारा अवगत कराया गया कि अटल के प्रधानमंत्री कार्यकाल में जो सुशासन किया गया वह आज भी अनुकरणीय व उपयोगी है। अटल ने राजनीति में मिलकर कार्य करने की शैली विकसित की।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता की कुछ पंक्तियो का पाठ किया गयाः-
गीत नया गाता हूॅ
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी, अन्तर की चीर व्यथा पलको पर ठिठकी,
हार नही मानूंगा, रार नई ठानूॅगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हॅू,
गीत नया गाता हूॅ
कार्यक्रम में दुनीचंद चंदानी द्वारा अवगत कराया गया कि अटल जी के व्यक्तित्व का कैनवास बहुत बड़ा है, और उन्हीं के पद-चिन्हों पर आज भारत आगे बढ़ रहा है। इस मौके पर नानक चंद ने अटल जी के साथ बिताए संस्मरणों को साझा किया।


