फाइलों में कैद हुआ व्हीसल ब्लोवर एक्ट!

कारागार विभाग: भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले किए जा रहा दंडित जेल विभाग के अधिकारी के लिए एक्ट का कोई मायने नहीं

फाइलों में कैद हुआ व्हीसल ब्लोवर एक्ट!
कारागार विभाग

लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ लाया गया व्हीसल ब्लोवर एक्ट का कारागार विभाग में कोई मायने नहीं रह गया है। एक्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यही नहीं एक्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले अधिकारी और कर्मचारी को आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा भी मुहैया कराई जाएगी। प्रदेश के कारागार विभाग में इस एक्ट का कोई मतलब ही नहीं रह गया है।

इस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने वाले अधिकारियों और कर्मियों को सुरक्षा देना तो दूर की बात है, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शिकायत करने वाले ऐसे कई अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को दंडित किया जा चुका है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आम जनमानस को लगातार मैसेजों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। बाकायदा मोबाइल नंबर जारी कर भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ उन नंबरों पर शिकायत दर्ज कराने को कहा जाता है। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखे जाने का वादा किया जाता है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए व्हीसल ब्लोवर एक्ट तक लाया गया है, लेकिन प्रदेश कारागार विभाग के शासन और मुख्यालय में बैठे आला अफसरों के लिए यह एक्ट बेमतलब साबित हो रहा है।

बीती 20 जनवरी को एटा जिला जेल में तैनात एक सुरक्षाकर्मी ने जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिकारी के महिला का यौन उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल किया। वायरल वीडियो की परिक्षेत्र के प्रभारी डीआईजी ने नियम विरुद्ध तरीके से आगरा जेल अधीक्षक से जांच कराई। जबकि जेल में किसी भी घटना की प्रारंभिक जांच जेल के ही अधीक्षक से कराए जाने का नियम है। जांच के बाद आरोपी जेलर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए वीडियो वायरल करने वाले सुरक्षाकर्मी को ही हटा दिया। सुरक्षाकर्मी को एटा जेल से हटाकर तीन माह के लिए कासगंज जेल भेज दिया। इस वीडियो जारी होने के कुछ दिन बाद ही एक महिला ने एटा जेल के जेलर के आवास पर जमकर हंगामा काटा। वायरल वीडियो में लगाएं गए आरोप की इस हंगामे से पुष्टि होने के बाद एक बार फिर से घटना की जांच इस बार एटा जेल अधीक्षक को सौंपी गई है। जांच चल रही है सूत्रों की माने तो आला अफसर इस जांच में भी दोषी जेलर को बचाने में जुटे हुए हैं। इससे पूर्व फिरोजाबाद जेल में मोटी रकम लेकर जेल में खूंखार अपराधियों को मुहैया कराने की शिकायत लेकर पहुंची महिला अधिकारी को हटा दिया गया था। भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर पहुंची इस महिला अधिकारी को विभाग के मुखिया आईजी जेल से मिलने तक नहीं दिया गया था। शिकायत करने गई इस महिला को फिरोजाबाद से हटाकर लखनऊ की महिला जेल पर तैनात कर दिया था। इसके अलावा मुरादाबाद जेल में जेलर ने अधीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत शासन और मुख्यालय के आला अफसरों से की। शिकायत पर ध्यान नहीं देने पर वह न्यायालय की शरण में चला गया। न्यायालय के निर्देश पर मामले की दो स्तर पर जांच कराई गई। दोनों जांच में जेल अधीक्षक के दोषी पाए जाने के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए शिकायतकर्ता की ही सेवा समाप्त कर दी गई। यह तो बानगी है। इस तरह कारागार विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ही दंडित किया जा रहा है।