दोषी अफसरों को बचाने में जुटे आला अफसर!

रायबरेली जेल में बंदी की आत्महत्या का मामला सुरक्षाकर्मियों पर कार्यवाही कर मामले को निपटाया वार्डर निलंबित, हेड वार्डर पर विभागीय कार्यवाही की संस्तुति

दोषी अफसरों को बचाने में जुटे आला अफसर!
रायबरेली जेल

लखनऊ। रायबरेली जिला कारागार में कैदी द्वारा आत्महत्या किये जाने के मामले में हर बार की तरह इस बार भी छोटे कर्मियों पर कार्यवाही कर दोषी अधिकारियों को बचा लिया गए। आला अफसरों ने छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही कर मामले को निपटा दिया।

सुरक्षा में लापरवाही बरतने के आरोप में एक वार्डर को निलंबित किया गया और एक हेड वार्डर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की गई है। 

बीते गुरुवार को रायबरेली जेल में एक विचाराधीन बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पूर्व गल्ला गोदाम में काम करने वाले बंदी वारिस राइन (28) की कटौती के राशन को लेकर कैंटीन में कार्यरत बंदी अतुल से नोंकझोंक हुई थी। इसके बाद बंदी वारिस ने सुरक्षाकर्मियों को चकमा देते हुए जेल अस्पताल और महिला बैरेक के सामने बनी दीवानी के सामने लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पत्नी की हत्या के आरोप में वर्ष 2019 से जेल में बंद वारिस ने आत्महत्या से पहले अपने पिता से फोन पर बात की थी। बातचीत में उसने कहा था कि वह जेल प्रशासन के अधिकारियों के उत्पीड़न और उगाही से तंग आ चुका है। जमानत करवाओ नहीं तो वह जान दे देगा। 

दोषियों को बचाने के लिए मंत्री तक हुई सिफारिश!

रायबरेली जेल में हुई आत्महत्या के मामले में दोषी अधिकारियों को बचाने के कारागार मंत्री तक सिफारिश की गईं। सूत्रों के मुताबिक घटना के बाद जेल के मुखिया ने केंद्र के किसी कद्दावर नेता से कारागार मंत्री को फोन कराया। इसके बाद विभाग के मंत्री ने विभाग के प्रभारी अधिकारी को फोन करके मामले को देख लेने की बात कही। इस संबंध में कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से काफी प्रयास के बाद भी बात नहीं हो पाई।

मिली जानकारी के मुताबिक जेल में निरुद्ध बंदी की आत्महत्या के मामले में वार्डर अनुज राजवंशी को निलंबित किया गया है और हेड वार्डर कमलेश कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। यह कार्यवाही शनिवार को घटना की जांच करने पहुंचे लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी रामधनी के निर्देश पर की गई। बताया गया है कि दोनों वार्डरो के खिलाफ लापरवाही बरतने के कारण यह कार्रवाई की गई है। यह अलग बात है कि इस मामले में सर्किल प्रभारी, गिर्दा प्रभारी के साथ मातहतों पर शिथिल नियंत्रण रखने वाले जेलर को बचा लिया गया। इस संबंध में जब डीआईजी रामधनी से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने निलंबन और विभागीय कार्यवाही किए जाने की संस्तुति किए जाने की पुष्टि की है।