कारागार विभाग के तबादलों को संज्ञान में लेंगे मुख्यमंत्री!

तबादलों में शासन-मुख्यालय स्तर पर जमकर हुई लूट और अनियमिताएं विभाग के संयुक्त सचिव और एआईजी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल स्टांप एवं पंजीयन विभाग की तरह कारागार विभाग में भी हुआ बड़ा खेल

कारागार विभाग के तबादलों को संज्ञान में लेंगे मुख्यमंत्री!
कारागार मुख्यालय

लखनऊ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तबादलों में अनियमिताएं और गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर स्टांप एवं पंजीयन और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के तबादलों को निरस्त कर कई अफसरों हटा दिया। मुख्यमंत्री की इस कार्यवाही से अन्य विभागों में हड़कंप मचा हुआ है। इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री ने कारागार विभाग के तबादलों की जांच कराई तो कई बड़े अफसरों पर कार्यवाही हो सकती है। विभाग में हुए तबादलों में जमकर अवैध वसूली और अनियमिताएं होने के मामले सामने आए है। शिकायतों के बाद भी विभाग के उच्च अधिकारियों मामले को दबा रखा है। मुख्यमंत्री ने विभाग में हुए तबादलों को संज्ञान में लेकर जांच कराई तो इस विभाग में भी कई बड़े अफसरों का पत्ता साफ हो सकता है। शिकायतों का यह मामला विभाग के अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है।  

स्थानांतरण सत्र में हुए तबादलों में लेने देन और अनियमिताएं मिलने की शिकायतों पर बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के निबंधक के साथ चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ सेवाएं विभाग के मुखियाओं को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया। इन विभागों के तबादलों में लेनदेन के साथ अनियमिताएं मिलने की कई शिकायतें मिली थी। मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लेकर आनन फानन यह कार्यवाही कर डाली। इस कार्यवाही से अन्य विभागों में अनियमित तरीके किए गए तबादलों को लेकर खलबली मची हुईं है।

बेतरतीब तबादलों से अधिकारी विहीन हुई कई जेल!
मुख्यालय के एआईजी प्रशासन के बेतरतीब ढंग से किए गए तबादलों की वजह से प्रदेश की कई जेलें अधीक्षक और जेलर विहीन हो गई। इन जेलों का संचालन भगवान भरोसे चल रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान समय में अधीक्षक और जेलर का तबादला हो जाने की वजह से प्रदेश की फतेहगढ़ जिला जेल, श्रावस्ती जिला जेल,  चित्रकूट जिला जेल, बलरामपुर जिला जेल, बहराइच जिला जेल, महराजगंज जिला जेल, सोनभद्र जिला जेल खाली पड़ी हुई है। ऐसा तब है जब विभाग के करीब एक दर्जन जेलर से अधीक्षक पद पर प्रोन्नत हुए नव प्रोन्नत अधीक्षकों का तबादला किया जाना है। सूत्र बताते है कि नव प्रोन्नत अधीक्षकों की तैनाती के लिए स्थानांतरण सत्र का कोई मायने नहीं है। इन्हें प्रोन्नत होने के तुरंत बाद तैनाती दिए जाने का प्रावधान है। इन अधीक्षकों की तैनाती को सिर्फ इसलिए रोका गया है कि स्थानांतरण का अनुमोदन प्रोन्नत अधीक्षकों के नाम पर लिया जाएगा और इसकी आड़ में मोटी रकम लेकर चहेते अधिकारियों को कमाऊ जेलों पर तैनात किया जाएगा।

सूत्रों का कहना है स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की तरह कारागार विभाग के तबादलों में भी लेनदेन का बड़ा खेल हुआ है। शासन में बैठे आला अफसरों ने मोटी रकम लेकर अनुभवहीन अधीक्षकों को पश्चिम की कमाऊ कही जाने वाली बुलंदशहर, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी जेलों पर स्थानांतरित कर दिया है। मजे की बात तो यह है कि एक नव प्रोन्नत अधीक्षक को वरिष्ठ अधीक्षक वाली मंडलीय कारागार बस्ती में तैनात कर दिया गया है। इसी प्रकार कारागार मुख्यालय के एआईजी प्रशासन ने बलिया, देवरिया सरीखी कई जेलों में तीन साल से अधिक समय का कार्यकाल बिताने वाले जेलरों को हटाने के बजाए कई उन जेलरों का तबादला कमाऊ जेलों पर कर दिया जो जिनका तबादला पिछले स्थानांतरण सत्र में ही हुआ था। मोटी रकम वसूल करके इन जेलरों को मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, आगरा समेत अन्य कमाऊ जेलों पर भेज दिया गया। लेनदेन करने वाले एक जेलर को पहले गाजियाबाद तो अगले दिन इस तबादले को निरस्त कर उसको बागपत जेल भेज दिया गया। पैसे के चलते एक जेलर को तो पांच सौ मीटर दूर स्थित जेल पर ही स्थानांतरित कर दिया गया है। यह तो बानगी है इसी प्रकार मोती रकम वसूल करके कई चहेते अधिकारियों को मनमाफिक जेली पर तैनात कर दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की तरह कारागार विभाग के तबादलों में भी लेनदेन और अनियमिताएं होने की तमाम शिकायतें सामने आई हैं। शासन और मुख्यालय के अधिकारियों ने अधीक्षक, जेलर और डिप्टी जेलरों को कमाऊ जेलों पर तैनात करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है। विभागीय मंत्री और अफसरों से हुई सेटिंग गेटिंग का यह मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ। चर्चा है कि मुख्यमंत्री स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की तरह कारागार विभाग के तबादलों की जांच करा दी जाए तो दूध का दूध पानी सामने आने के साथ धन उगाही कर तबादला करने अधिकारियों के भ्रष्टाचार का भी खुलासा हो जाएगा। उधर विभाग के आला अफसर इस मामले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।