जांचे निपटाने कारागार मुख्यालय आए डीआईजी जेल!

लखनऊ में बैठकर करेंगे आगरा रेंज के जेलों की निगरानी प्रमुख सचिव कारागार ने आगरा के साथ दिया मुख्यालय का प्रभार

जांचे निपटाने कारागार मुख्यालय आए डीआईजी जेल!
कारागार मुख्यालय

लखनऊ। शासन में बैठे कारागार विभाग के आला अफसरों की महिमा अपरंपार है। डीआईजी आगरा जेल परिक्षेत्र को आगरा के साथ कारागार मुख्यालय का प्रभार सौंप दिया गया। यह मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि राजधानी लखनऊ में बैठकर डीआईजी आगरा परिक्षेत्र की जेलों की निगरानी करेंगे। डीआईजी कारागार मुख्यालय में हुई तैनाती को लेकर चर्चा है कि अपने खिलाफ चल रही जांचों को निपटाने के लिए यह तैनाती कराई गई है। बीते दिनों डीआईजी आगरा जेल ने शासन में सेटिंग गेटिंग कर आगरा के साथ डीआईजी मुख्यालय का प्रभार भी आवंटित कराया है।

स्थानांतरण सत्र समापन के एक दिन पहले प्रमुख सचिव कारागार के निर्देश पर विभाग के सचिव ने दो डीआईजी के कार्यों में फेरबदल किए जाने का आदेश जारी किया। इसमें आगरा के साथ कानपुर जेल परिक्षेत्र का प्रभार संभाल रहे पी एन पांडेय से कानपुर परिक्षेत्र का प्रभार छीन लिया गया। डीआईजी पी एन पांडेय को आगरा परिक्षेत्र के साथ कारागार मुख्यालय का प्रभार सौंपा गया है। कानपुर जेल परिक्षेत्र का प्रभार हाल ही में कारागार विभाग में स्थानांतरित किए गए आईपीएस अधिकारी प्रदीप गुप्ता को दिया गया है।

डीपीसी के लिए डीजी की जगह डीआईजी हो गए नामित!
कारागार विभाग में जेलर से अधीक्षक पद पर प्रोन्नति के लिए बीती मई माह में विभागीय प्रोन्नति कमेटी (डीपीसी) बैठक लोक सेवा आयोग प्रयागराज में होनी थी। डीपीसी बैठक में विभाग के विभागाध्यक्ष के शामिल होने का प्रावधान है। सूत्रों के मुताबिक डीआईजी आगरा परिक्षेत्र ने शासन में सेटिंग गेटिंग करके डीपीसी बैठक के लिए स्वयं का नामित करा लिया था। डीआईजी के नामित होने पर आयोग ने आपत्ति जाहिर की। आयोग की आपत्ति के बाद डीपीसी लिए एआईजी कारागार प्रशासन को नामित कर डीपीसी की प्रक्रिया का पूरा करवाया गया। सूत्रों की माने तो शासन में सेटिंग गेटिंग रखने वाले अधिकारियों के लिए विभाग में कोई नियम और कानून का कोई मायने नहीं रह गया है।

सूत्रों का कहना है कि शासन में सेटिंग गेटिंग कर डीआईजी पीएन पांडेय ने कारागार मुख्यालय का प्रभार आवंटित कराया। वर्तमान समय में डीआईजी आगरा जेल परिक्षेत्र की कैदियों की समयपूर्व रिहाई के केंद्रीय कारागार नैनी और केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ से शासन को भेजे गए गलत प्रस्ताव की जांच चल रही है। कानपुर देहात जेल से समयपूर्व रिहाई के भेजे गए गलत प्रस्ताव में अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया जबकि नैनी और फतेहगढ़ मामले में कोई कार्यवाही ही नहीं की गई। इसी प्रकार वरिष्ठ अधीक्षक लखनऊ के कार्यकाल के दौरान जेल में बंद पूर्व मंत्री के जेल के अंदर से मोबाइल फोन के माध्यम से वाराणसी के एक व्यवसाई को धमकी दिए जाने के मामले की भी जांच चल रही है। इसके साथ ही नियम विरुद्ध तरीके से मृतक आश्रित महिला को नियुक्ति दिए जाने के मामले की भी जांच हो रही है। सूत्रों की माने तो इन जांचों को निपटाने के लिए डीआईजी मुख्यालय का प्रभार आवंटित कराया गया है। यही नहीं डीआईजी आगरा जेल परिक्षेत्र लखनऊ में बैठकर सवा तीन सौ किलोमीटर दूर स्थित जेलों की निगरानी करेंगे। ऐसा तब जब वह आगरा परिक्षेत्र में बैठकर कानपुर परिक्षेत्र के जेलों के ठीक ढंग से निगरानी नहीं कर पाए थे। एटा, फतेहगढ़ और ललितपुर जेल की घटनाएं खुद ही इस सच को प्रमाणित करती नजर आ रही हैं। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन ही नहीं उठा।