अवैध वसूली से मजाक बने कारागार विभाग के तबादले!
पैदल चलकर पहुंच जाने वाली जेल पर कर दिया ट्रांसफर अधीक्षक-जेलर को हटाकर अधिकारी विहीन कर दी जेल
लखनऊ। विभागीय मंत्री और अधिकारियों की धनउगाही ने कारागार विभाग के तबादलों को मजाक बनाकर रख दिया। एक जेल से अधीक्षक और जेलर दोनों को हटाकर जेल को अधिकारी विहीन कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर एक जेलर का तबादला उस जेल पर कर दिया गया जिस जेल पर टहलकर पैदल पहुंचा जा सकता है। यही नहीं एक उस जेल पर जेलर तैनात कर दिया गया जिस जेल पर हाल ही में जेलर को अस्थाई ड्यूटी खत्म कर भेजा गया था। यह अलग बात है इस तबादले को अगले ही दिन निरस्त कर दिया गया। यह तबादले विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बने हुए है। चर्चा तो यहां तक हो रही है कि मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो शिक्षा विभाग की तरह कारागार विभाग के तबादलों को निरस्त कर स्थानांतरण सत्र शून्य घोषित किया जा सकता है।
| कारागार विभाग में हुए बेतरतीब तबादलों का एक और रोचक मामला प्रकाश में आया है। धनउगाही कर शनिवार को किए गए एक तबादले को रविवार को ही निरस्त करना पड़ गया। तबादलों के लिए अवैध वसूली को लेकर चर्चा में रहने वाले अपर महानिरीक्षक (एआईजी) कारागार प्रशासन ने शनिवार को जेलर की तबादला सूची में आजमगढ़ जेल पर तैनात जेलर विकास कटियार का तबादला गाजियाबाद जेल पर किया। गाजियाबाद जेल पर पहले से जेलर तैनात था। इस जेलर की करीब दस दिन पहले पूर्व आईजी जेल ने गाजियाबाद से मेरठ में लगाई गई अस्थाई ड्यूटी को समाप्त कर वापस गाजियाबाद भेजा था। ऊंची पहुंच और जुगाड़ के बल पर गाजियाबाद जेलर को जैसे ही नए जेलर के तैनाती की भनक लगी उसने आनन फानन से उसकी तैनाती को निरस्त कराने की सिफारिश की। एआईजी कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह ने विकास कटियार के गाजियाबाद हुए तबादले को निरस्त कर उन्हें बागपत जेल स्थानांतरित कर दिया। सूत्रों की माने तो एआईजी प्रशासन ने धन वसूली करके कई ऐसे जेलर और डिप्टी जेलरों को कमाऊ जेलों पर तैनात कर दिया जिनका स्थानांतरण पिछले सत्र में ही हुआ था। |
स्थानांतरण सत्र समाप्त होने के एक दिन पहले शनिवार को कारागार विभाग में अधीक्षक, जेलर और डिप्टी जेलर संवर्ग के तबादलों की सूची जारी की गई। शासन और कारागार मुख्यालय की ओर से जारी की गई इन सूचियों में अजब गजब कारनामे देखने को मिले। कारागार मंत्री के अनुमोदन पर शासन की ओर से जारी की गई सूची में चित्रकूट जेल अधीक्षक शशांक पांडेय को मैनपुरी और मुख्यालय की ओर से जारी की गई सूची में चित्रकूट के जेलर संतोष कुमार वर्मा को केंद्रीय कारागार आगरा स्थानांतरित कर दिया। इस जेल पर शासन और मुख्यालय ने न तो कोई अधीक्षक तैनात किया और न ही कोई जेलर तैनात किया। फिलहाल चित्रकूट जेल अधिकारी विहीन हो गई है। वर्तमान समय में इस जेल पर न कोई अधीक्षक और न ही कोई जेलर तैनात है।
इसी प्रकार जेलर की तबादला सूची में भी एक रोचक मामला सामने आया है। इस सूची में केंद्रीय कारागार नैनी में तैनात जेलर आलोक कुमार को जिला कारागार प्रयागराज की जेल पर तैनात किया गया है। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय कारागार नैनी और जिला कारागार प्रयागराज एक ही परिसर में बनी हुई हैं। इन दोनों के बीच की करीब पांच सौ मीटर से भी कम होगी। कर्मचारी और अधिकारी इन जेलों पर बगैर किसी वाहन के भी आजा सकते है। सूत्रों की माने तो जेल आलोक कुमार को कुछ समय पहले केंद्रीय कारागार नैनी में तैनात किया गया था। जेलर की न तो समयपूर्ण हुआ था और न ही कोई शिकायत थी फिर भी उसने धनबल के सहारे अपना तबादला बगल वाली जेल पर कर लिया। कुछ ऐसा ही हाल बरेली में भी देखने को मिला। केंद्रीय कारागार बरेली में तैनात आनंद सिंह ने अपना तबादला इसी जनपद की जिला जेल में करा लिया। यह तबादले विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बने हुए है। कयास लगाए जा रहे है न बाप बड़ा न भइया सबसे बड़ा रुपईया यह कहावत विभाग के अफसरों पर एकदम फिट बैठती है। धनबल पर इस विभाग में तबादला किसी भी जगह पर कराया जा सकता है। उधर इस संबंध में कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से काफी प्रयासों के बाद भी बात नहीं हो पाई।


