रायबरेली जेल में लॉकिंग तक खुली रहती कैंटीन!
रायबरेली जेल में लॉक होने तक खुली रहती कैंटीन! गल्ला गोदाम में कार्यरत बंदी की कैंटीन संचालक से हुई थी भिड़ंत जेल प्रशासन के उत्पीड़न और उगाही से त्रस्त जेल के बंदी
लखनऊ। रायबरेली जेल में बंदी की मौत के बाद एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। जेल में कैंटीन और जेल एक साथ बंद होती है। गल्ला गोदाम में तैनात बंदी की कैंटीन संचालक बंदी से राशन को लेकर नोंकझोंक हुई थी। इसी के कुछ समय बाद ही बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जेल में अधिकारियों की अवैध वसूली और उत्पीड़न से जेल के बंदी काफी त्रस्त है। उधर जेल प्रशासन के अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।
परिजनों ने आत्महत्या नहीं, हत्या का लगाया आरोप
रायबरेली जेल में विचाराधीन बंदी के मौत की जांच करने जेल पहुंचे लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी रामधनी से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा। उधर दूसरी ओर मृतक बंदी वारसी के परिजनों का आरोप है कि वारसी ने आत्महत्या नहीं की उसकी हत्या की गई है। परिजनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही किए जाने की मांग की है।
दो दिन पहले रायबरेली जेल में गल्ला गोदाम के राइटर बंदी वारिस ने पेड़ पर लटकर आत्महत्या कर ली थी। घटना शाम साढ़े सात बजे के बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है गल्ला गोदाम से बंदियों के राशन में कटौती कर कैंटीन में खाद्य सामग्री तैयार करने के लिए राशन पहुंचाता था। हर दिन की तरह उस दिन भी गल्ला गोदाम में कार्यरत बंदी कटौती का राशन पहुंचाने कैंटीन गया था। इस दौरान उसकी कैंटीन संचालित करने वाले बंदी अतुल से राशन को लेकर नोंकझोंक हो गई थी। मौजूद लोगों ने समझबुझाकर किसी तरह मामले को शांत करा दिया। इसके बाद मौका पाकर बंदी वारिस ने महिला बैरेक और अस्पताल के बीच अंग्रेजों के समय बनी दीवानी के सामने लगे पेड़ पर लटककर जीवनलीला को समाप्त कर लिया।
रायबरेली जेलर का विवादों से गहरा रिश्ता
रायबरेली जेल पर तैनात जेलर हिमांशु रौतेला का विवादों से गहरा रिश्ता रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक लखनऊ जिला जेल में तैनाती के दौरान प्रदेश के बहुचर्चित साइन सिटी मामले की पावर ऑफ अटॉर्नी जब जेल से बाहर गई थी। उस समय ड्यूटी पर डे ड्यूटी बतौर डिप्टी जेलर इन्हीं की थी। मामले की जांच में तत्कालीन प्रभारी डीआईजी ने इन्हें भी दोषी ठहराया था। चर्चा तो यह भी है कि यह जेलर अधिकारियों के पुल का पैसा तक हजम कर जाते है।
सूत्रों का कहना है कि रायबरेली जेल की पूरी व्यवस्था ही अस्त व्यस्त है। इस जेल में जेल बंद होने और खुलने का कोई निश्चित समय नहीं है। दिलचस्प बात यह कि जेल में जेल बंद होने तक कैंटीन खुली रहती है। कैंटीन खुली होने की वजह से बंदियों का आवागमन देर रात तक जारी रहता है। जेल प्रशासन की लापरवाही और हीलाहवाली का लाभ उठाकर बंदी आत्महत्या कर ली। बताया गया है कि जेल में बंदियों से प्रथम अक्षर (अल्फाबेटिकली) रखने, काम नहीं करने के एवज में जमकर वसूली की जा रही है। जेल अस्पताल में बगैर पैसा लिए बंदियों का इलाज ही नहीं किया जाता है। समय पर उपचार नहीं मिल पाने की वजह से पहले भी बंदियों की मौत हो चुकी है। इस संबंध में जब जेल अधीक्षक अमन कुमार सिंह और जेलर हिमांशु रौतेला से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो दोनों ही अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया।


