District Jail Kannauj: रिटायरमेंट से पहले कमाई का कोई मौका नहीं छोड़ रहे अधीक्षक!
कन्नौज जेल में बंदियों से बैठकी और मशक्कत के नाम पर 3600 रुपए की अवैध वसूली हो रही है। कनिष्ठ सहायक जेल प्रशासन पर हावी होकर न सिर्फ डिप्टी जेलर के कार्यों में दखल दे रहा है, बल्कि सिपाहियों की ड्यूटी भी लगा रहा है। जेलकर्मियों और बंदियों में इस भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश है। जेल अधीक्षक 31 मार्च को रिटायर हो रहे हैं और जाते-जाते कमाई का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। वहीं, कारागार मुख्यालय के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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जेल में बैठकी और मशक्कत के लिए वसूले जा रहे 3600 रुपए
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कनिष्ठ सहायक की कार्यप्रणाली से जेलकर्मियों में आक्रोश
लखनऊ। कन्नौज जेल अधीक्षक रिटायरमेंट से पहले कमाई का कोई मौका छोड़ना नहीं चाह रहे है। यही वजह है कि जेल के अंदर बंदियों को दी जाने वाली अनाधिकृत सुविधाओं के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी कर दी गईं हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जेल में डिप्टी जेलर होते हुए डिप्टी जेलर का काम कनिष्ठ सहायक बाबू के हाथों में है। कमाई बढ़ाने के लिए यह बाबू सिपाहियों की ड्यूटी तक लगा रहा है।
सौंपे जाने का मामला अभी निपट नहीं पाया की एक नया मामला सामने आ गया। जेल के अधिकारियों ने मशक्कत के नाम पर लूट मचा रखी है। बंदियों से मशक्कत के नाम पर 3300 के साथ बैठकी के लिए 300 रुपए मिलकर कुल 3600 रूपये वसूल किए जा रहे है। इस अवैध वसूली से बंदियों और जेलकर्मियों दोनों में खासा आक्रोश व्याप्त है।
परिक्षेत्र डीआईजी का जेलों पर नहीं कोई नियंत्रण
कन्नौज जेल की अव्यवस्थाओं के संबंध में जब कानपुर परिक्षेत्र के प्रभारी डीआईजी प्रेमनाथ पांडे से संपर्क करने का प्रयास किया तो कई प्रयासों के बाद भी उनसे बात नहीं हो पाई। कन्नौज जेल अधीक्षक मोहम्मद अकरम से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका सीयूजी नंबर (9454469149) नहीं उठा। ऐसा तब है जब पिछले दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक आदेश जारी किया था। जिसमें स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया कि कोई भी अधिकारी सरकारी (सीयूजी) फोन न तो बंद नहीं रखेगा।
कानपुर जेल परिक्षेत्र की कन्नौज जेल में लंबे समय से तैनात बाबू की प्रताड़ना और अवैध कार्यों में संलिप्तता से जेल के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी काफी त्रस्त हैं। जेल में कनिष्ठ लिपिक संवर्ग का यह बाबू पिछले करीब 10 साल से अधिक समय से कन्नौज जेल पर तैनात है। लंबे समय से एक ही जेल पर तैनात होने की वजह से उसने अपने प्रभाव के कारण जेल प्रशासन के अधिकारियों पर दबदबा बना रखा है। लंबे समय से तैनात होने की वजह से उसके रसूखदार बंदियों से अच्छे संबंध है। वह उनके लिए अप्रत्यक्ष रूप से अवैध सामान पहुंचा करके बंदियों से मोटी रकम वसूल करता है। यह बाबू प्रभावी, रसूखदार बंदियों की मुलाकात अपने कार्यालय में कराता है। इसके बदले में बाबू बंदियों से मोटी रकम वसूल करता है।
सूत्रों का कहना हैं कि यही नहीं जेल में अधिकारियों के मशक्कत और बैठकी के नाम पर हो रही अवैध वसूली से बंदी काफी परेशान है। बताया गया है कि इस जेल में अधिकारियों और बाबू ने वसूली में कई बड़ी जेलों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस जेल में मशक्कत के नाम पर 3300 रुपए और काम नहीं करने के एवज में बैठकी के लिए 300 रुपए प्रति बंदी वसूल किया जा रहा है। कन्नौज जेल अधीक्षक 31 मार्च को सेवानिवृत होने सेवपहले कमाई का कोई मौका चूकना नहीं चाहते है। दिलचस्प बात यह है कि कारागार मुख्यालय के आला अफसर सब कुछ जानकर अनजान बने हुए। दोषियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने की वजह से जेल के बंदियों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है।


