आईजी जेल से संभाले नहीं संभल रहा जेल विभाग!

प्रदेश की जेलों में थमने का नाम नहीं ले रहीं घटनाएं अल्फाबेटिकल व्यवस्था से बढ़ी जेलों में आत्महत्याएं

आईजी जेल से संभाले नहीं संभल रहा जेल विभाग!
नैनी जेल

उत्तर प्रदेश: आईजी जेल के तुगलकी फरमान से जेलों में आत्महत्याओं की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। विभाग में जेल में इस्तेमाल के लिए खरीदी गई वस्तुओं को घर ले जाने पर अंकुश लगाने वाले कर्मियों की पिटाई कर दी जा रही है। प्रयागराज जिला जेल में जेल प्रशासन के उत्पीड़न से परेशान होकर एक बंदी ने फांसी लगाकर जान दे दी। इससे पहले जेलों में बंदियों के लगातार आत्महत्याएं करने के बावजूद आईजी जेल ने आजतक किसी दोषी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की। जेलों में आए दिन हो रही घटनाओं को लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कयास लगाए जा रहे है कि आईजी जेल से कारागार विभाग संभाले नहीं संभल रहा है। आईजी जेल मीटिंगों में व्यस्त है वहीं जेलों में घटनाएं थम नहीं रही हैं।

नैनी जिला जेल में विचाराधीन बंदी की संदिग्ध मौत

लखनऊ। प्रदेश की जेलों में बंदियों के आत्महत्याओं की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रयागराज की नैनी जिला जेल में बंदी की गलत रिहाई पर कोई कार्यवाही नहीं होने के बाद शनिवार को एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बंदी के परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं हत्या है। जेल प्रशासन की लापरवाही से बंदी की मौत हो गई। इस मौत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अल्फाबेटिकल व्यवस्था से मौत को गले लगा रहे बंदी!

आईजी जेल की अल्फाबेटिकल बैरेक आवंटन की व्यवस्था के बाद से जेलों में बंदियों के आत्महत्या की घटनाएं बढ़ गई है। इस व्यवस्था से बंदी और अधिकारी दोनों ही अवसाद में आ गए हैं। बंदी अवसाद में आने से मौत को गले लगा रहे हैं, वही अधिकारी इस व्यवस्था से कमाई करने में जुटे हुए है। बीते दो माह में मैनपुरी, झांसी में दो दो बंदी, लखनऊ, बरेली, इटावा, महोबा, हमीरपुर, प्रयागराज, फिरोजाबाद समेत कई अन्य जेलों में दर्जनों बंदी मौत को गले लगा चुके हैं। मुख्यालय के अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक प्रयागराज नैनी इलाके के इंदलपुर के रहने वाले अफरोज अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर सात जून को जेल भेजा था। दो दिन पहले बंदी जेल में 2 दिन पहले बंदी अफरोज का शुगर लेवल कम हो गया था। बंदी की हालत बिगड़ने पर उसको जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान मौका पाकर उसने अहाते में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

अफरोज के पिता अफसर अली का कहना है कि दो दिन पहले उसकी मां उससे मिलने भी गई थी। उस दौरान वह बिल्कुल ठीक था। परिजनों का आरोप है जेल प्रशासन की लापरवाही से उनके बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं हत्या है। इसकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।