जेल विभाग में आतंक का पर्याय बनी अस्थाई ड्यूटी!
ड्यूटी के नाम पर अधिकारियों/कर्मियों से हो रही जमकर वसूली सुरक्षाकर्मियों से गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, अलीगढ़ के लिए ली जा रही मोटी रकम
लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए अस्थाई ड्यूटी आतंक का पर्याय बन गई है। विभाग में अस्थाई ड्यूटी के लिए अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर दहशत बनाकर कमाऊ जेलों पर भेजे जाने के लिए मोटी रकम वसूल की जा रही है। हकीकत यह है कि विभाग में अस्थाई ड्यूटी अधिकारियों की वसूली का हथियार बनकर रह गई है। जेल सुरक्षाकर्मियों से गाजियाबाद, नोएडा, अलीगढ़ और मेरठ जेल पर अस्थाई ड्यूटी लगाने के लिए मोटी रकम वसूल की जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि विभाग में अस्थाई ड्यूटी लगाने और हटाने दोनों के लिए वसूली की जा रही है। उधर विभाग के आला अफसर इस गंभीर मसले पर चुप्पी साधे हुए है।
| जेलों पर दंडित किए गए अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की अस्थाई ड्यूटी लगाने में भी बड़ा खेल चल रहा है। विभाग में कर्मियों की अस्थाई ड्यूटी दो माह, तीन माह और अग्रिम आदेश तक के लिए लगाई जाती है। आला अफसर अस्थाई ड्यूटी लगाकर भूल जा रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद जेल में अवैध मुलाकात के लिए दोषी पाए गए जेलर किशोर कुमार दीक्षित की ड्यूटी जौनपुर जेल पर लगाई गई थी। शासन में मजबूत पकड़ रखने वाले इस जेलर ने एक माह भी नहीं बीता था कि अपनी ड्यूटी मेरठ जेल पर लगवा ली। करीब छह माह से अधिक समय सेवा मेरठ में ही जमे हुए है। इन्होंने गाजियाबाद में जेलर आवास पर अभी भी कब्जा जमा रखा है। इसी प्रकार केके दीक्षित के स्थान पर बाराबंकी से अस्थाई ड्यूटी पर भेजे गए जेलर आलोक शुक्ला अभी तक वहीं पर लगे हुए है। यह तो बानगी है इस प्रकार दर्जनों की संख्या में जेल अधिकारी और सुरक्षाकर्मी एक बार अस्थाई ड्यूटी पर लगाए जाने के बाद आज तक हटाए ही नहीं गए हैं। |
मिली जानकारी के मुताबिक कारागार विभाग में पूर्व में जेलों पर अनियमिताओं मिलने, अवैध वसूली समेत अन्य शिकायतों में दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मियों को अटैचमेट (संबद्ध) किए जाने की व्यवस्था थी। इस मामले में संबद्ध करने के नाम पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर शासन और मुख्यालय ने इस व्यवस्था को ही समाप्त करने का निर्देश दिया। निर्देश में कहा गया कि विभाग में अब किसी भी अधिकारी और कर्मचारी किसी भी जेल से संबद्ध नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था कुछ ही समय तक चल पाई कि अधिकारियों ने इसका विकल्प तलाश लिया। विकल्प के तहत अब जेलकर्मियों और अधिकारियों को किसी भी जेल से संबद्ध नहीं किया जाता है। संबद्ध किये जाने के बजाए अब अधिकारी और सुरक्षाकर्मी को अस्थाई ड्यूटी पर लगाए जाने की व्यवस्था कर दी गई।
सूत्रों का कहना है कि इस नई व्यवस्था में विभागीय अधिकारियों ने लूट मचा रखी है। प्रदेश की जेलों में सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों से अस्थाई ड्यूटी लगाने के नाम पर मोटी रकम वसूल की जा रही है।अधिकारी और कर्मचारी कारागार मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग कर अपनी अस्थाई ड्यूटी कमाऊ जेलों पर लगवा ले रहे हैं। इसके एवज में अधिकारी कर्मचारियों से मोटी वसूली कर रहे है। सूत्रों की माने तो आगरा जेल परिक्षेत्र में अस्थाई ड्यूटी के नाम पर लूट मची हुई है। बताया गया है कि परिक्षेत्र के मुखिया ने आगरा सेंट्रल जेल से वार्डर की कमी की सूची मांगी। फिर परिक्षेत्र की जेलों से आगरा सेंट्रल जेल भेजे जाने का एक परिपत्र जारी कर वार्डर की सूची मांगी गई। सूची के वार्डर को जेल पर रोके जाने एवं अस्थाई ड्यूटी लगाने के नाम पर जमकर वसूली की गई। यह सिलसिला प्रदेश की जेलों में बदस्तूर जारी है। उधर इस संबंध में जब आईजी जेल पीवी रामाशास्त्री से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।


