रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 80 वर्ष की आयु में निधन

अयोध्या: रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 80 वर्ष की उम्र में निधन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बुधवार सुबह 7 बजे उन्होंने लखनऊ PGI में अंतिम सांस ली। 3 फरवरी को ब्रेन हैमरेज के बाद उन्हें अयोध्या से लखनऊ रेफर किया गया था। आचार्य सत्येंद्र दास 32 वर्षों से रामलला के मुख्य पुजारी थे और 1992 में बाबरी विध्वंस के दौरान रामलला को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की अहम भूमिका निभाई थी। उनका अंतिम संस्कार अयोध्या में विधि-विधान से किया जाएगा।

रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 80 वर्ष की आयु में निधन
मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास

लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने बुधवार सुबह 7 बजे लखनऊ स्थित संस्थानिक चिकित्सा केंद्र (PGI) में अंतिम सांस ली। बताया गया कि 03 फरवरी को मस्तिष्क आघात (ब्रेन हैमरेज) होने के बाद उन्हें अयोध्या से लखनऊ रेफर किया गया था। 

आचार्य सत्येंद्र दास के पार्थिव शरीर को अयोध्या लाया जाएगा, जहां सत्य धाम गोपाल मंदिर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि वे 32 वर्षों से रामलला मंदिर में मुख्य पुजारी के रूप में सेवा प्रदान कर रहे थे।  

संन्यास जीवन और राम मंदिर से जुड़ाव

आचार्य सत्येंद्र दास का जन्म 20 मई 1945 को उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर जिले में हुआ था, जो अयोध्या से 98 किमी दूर स्थित है। बाल्यकाल से ही वे धार्मिक प्रवृत्ति के थे और अयोध्या में अपने पिता के साथ नियमित रूप से आते-जाते रहते थे। उनके पिता अभिरामदास जी के आश्रम में जाया करते थे, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने भी वहीं संन्यास ग्रहण करने का निर्णय लिया। 

उन्होंने 1958 में गृह त्याग कर संन्यासी जीवन अपना लिया। उनके पिता ने भी उनके इस निर्णय को स्वीकार कर आशीर्वाद दिया था। तत्पश्चात, उन्होंने संस्कृत शिक्षा ग्रहण की और संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण विभाग में सहायक शिक्षक के रूप में कार्य किया।  

राम जन्मभूमि आंदोलन और पुजारी के रूप में नियुक्ति

आचार्य सत्येंद्र दास 1992 के दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे। 06 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे के विध्वंस के समय उन्होंने रामलला की मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की जिम्मेदारी निभाई। 

फरवरी 1992 में तत्कालीन मुख्य पुजारी लालदास को हटाने के निर्णय के बाद, 1 मार्च 1992 को आचार्य सत्येंद्र दास को मुख्य पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया। उन्हें अधिकार प्राप्त हुआ कि वे चार सहायक पुजारियों की नियुक्ति कर सकते हैं। 

रामलला मंदिर में सेवा और जिम्मेदारियां  

2007 में संस्कृत महाविद्यालय से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने पूर्ण रूप से राम जन्मभूमि मंदिर में अपनी सेवाएं समर्पित कर दीं। वर्ष 2024 में 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत उनकी जिम्मेदारियां और अधिक बढ़ गई थीं। 

श्रद्धांजलि और अंतिम संस्कार

आचार्य सत्येंद्र दास के निधन पर अयोध्या सहित संपूर्ण धार्मिक जगत में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार अयोध्या में विधि-विधान के साथ किया जाएगा।