बनेगा 40 मेगावाट का सोलर प्लांट : काशी, मथुरा और अयोध्या समेत पांच शहरों में चलेगी सोलर बोट
सोलर बोट के संचालन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पांच स्थलों से इसकी शुरुआत करने के बाद प्रदेश के हर धार्मिक स्थल पर इस सुविधा की तैयारी है। उन्होंने दावा किया कि अभी तक सरकारी क्षेत्र में देश के किसी भी राज्य में यह सुविधा नहीं दी गई है। ऐसे में सोलर बोट शुरू करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य होगा।
प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अब सोलर बोट चलाने की तैयारी है। पहले चरण में यह अयोध्या, काशी, मथुरा सहित पांच धार्मिक स्थलों पर चलेगी। इसकी शुरुआत अयोध्या से होगी। यहां एक-एक करोड़ रुपये कीमत की दो बोट खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस तरह का प्रयोग करने वाला यूपी पहला राज्य है।
अयोध्या सोलर सिटी के रूप में विकसित हो रही है। ऐसे में अब यहीं से सोलर बोट की भी शुरुआत होगी। इस बोट से श्रद्धालु सरयू नदी के दर्शन पूजन कर सकेंगे तो जल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। करीब एक करोड़ की लागत वाली इस बोट पर एक साथ 12 से 15 लोग बैठ सकेंगे।
इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके बाद काशी, मथुरा, प्रयागराज और गढ़मुक्तेश्वर में सोलर बोट शुरू की जाएगी। यहां मार्च 2024 से पहले सोलर बोट के संचालन की तैयारी है। इसके बाद अगले सत्र में चित्रकूट, आगरा, गोरखपुर, जौनपुर सहित अन्य नदी के किनारे वाले शहरों में यह सुविधा दी जाएगी। नेडा का प्रयास है कि हर नदी के किनारे बसे शहरों में सोलर बोट का संचालन किया जाए। इससे डीजल से चलने वाली बोट से नदियों में होने वाला प्रदूषण भी खत्म होगा।
नेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी एसडी दुबे ने बताया कि सोलर बोट के संचालन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पांच स्थलों से इसकी शुरुआत करने के बाद प्रदेश के हर धार्मिक स्थल पर इस सुविधा की तैयारी है। उन्होंने दावा किया कि अभी तक सरकारी क्षेत्र में देश के किसी भी राज्य में यह सुविधा नहीं दी गई है। ऐसे में सोलर बोट शुरू करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य होगा।
बनेगा 40 मेगावाट का सोलर प्लांट : प्रदेश में सोलर ऊर्जा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। अयोध्या में सभी सरकारी कार्यालयों को रूफटॉप सोलर पावर प्लांट से सुसज्जित किया गया है। अब तक करीब 4.8 मेगावाट के रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापति किए जा चुके हैं। अब यहां सरयू के किनारे करीब 200 करोड़ की लागत से 40 मेगावाट का प्लांट लगाया जा रहा है।
यहां से तैयार होने वाली ऊर्जा को ग्रिड के जरिए पावर कॉरपोरेशन को उपलब्ध कराया जाएगा। इसी तरह मिर्जापुर, महोबा, झांसी सहित अन्य जलाशय वाले इलाके में खाली पड़ी जमीन पर सोलर प्लांट के जरिए ऊर्जा इकट्ठा कर पावर कॉरपोरेशन को उपलब्ध कराई जाएगी। कॉरपोरेशन को भी महंगी दर पर कम से कम बिजली खरीदनी पड़ेगी।
सोलर बोट से कई तरह के फायदे हैं। श्रद्धालु एवं पर्यटकों के लिए यह रूचिकर होगा। अयोध्या को पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर ले जाने की तैयारी है। सोलर बोट की शुरुआत भी अयोध्या से ही की जाएगी। यहां के सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। अब निजी भवनों पर लगाने की दिशा में काम चल रहा है।-अनुपम शुक्ला, निदेशक नेडा
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जेनरेटर से चलने वाली नाव की तरह ही सोलर बोट भी है। इस नाव के ऊपर एक छत डवलप की जाती है। इस पर सोलर पैनल को स्थापित करते हैं। सौर लाइट की तरह ही इसमें भी सौर ऊर्जा को इकट्ठा करने के उपकरण लगे होते हैं। नाव को चलाने में यह ऊर्जा कारगर होती है। केरल स्टेट इनलैंड नेविगेशन कॉरपोरेशन (केएसआईएनसी) ने पहली बार सौर ऊर्जा से चलने वाली नाव लांच की है। इस बोट के ऊपर लगे पैनल से 27 किलोवाट ऊर्जा का उत्पादन होता है। इसे 3.95 करोड़ रुपये से श्रीलंका से मंगाया गया था। लेकिन सरकारी क्षेत्र में इस सोलर बोट की शुरुआत उत्तर प्रदेश से हो रही है। |


