स्थानांतरण के बाद रिलीव नहीं हो पा रहे कारागार अधिकारी!
प्रस्थानी तैनात नहीं होने से पशोपेश में फंसे जेल अफसर एआईजी प्रशासन की अवैध वसूली का दिखने लगा असर
लखनऊ। कारागार विभाग में अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और बाबू संवर्ग के तबादले तो का दिए गए। तबादले हुए करीब दस दिन होने को है लेकिन दर्जनों की संख्या में स्थानांतरित अधिकारियों और कर्मियों को रिलीव तक नहीं किया गया है। एआईजी कारागार प्रशासन के बेतरीब तरीके से किए गए तबादलों का खामियाजा विभाग के अधिकारियों और कर्मियों को भुगतने के लिए विवश होना पड़ रहा है। एआईजी प्रशासन ने मोटी रकम लेकर अधिकारियों और कर्मियों के तबादले तो कर दिए किंतु स्थानांतरित कर्मियों के स्थान पर किसी को तैनात ही नहीं किया। यह मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा तो यहां तक है कि एआईजी प्रशासन के मनमाने ढंग से किए गए तबादलों से कई जेलों की व्यवस्थाएं तक चौपट हो गई हैं।
स्थानांतरण सत्र के अंतिम दो दिनों में प्रदेश कारागार मुख्यालय के एआईजी कारागार प्रशासन ने जेलर, डिप्टी जेलर एवं बाबू संवर्ग कर्मियों के ताबड़तोड़ तबादले किए। सूत्रों का कहना है मोटी रकम लेकर दर्जनों की संख्यां में जेलर और डिप्टी जेलरों को पश्चिम के कमाऊ जेलों पर तो तैनात कर दिया गया लेकिन स्थानांतरित जेलर और डिप्टी जेलर के स्थान पर किसी अधिकारी को तैनात नहीं किया गई। प्रदेश की फतेहगढ़ जिला कारागार, चित्रकूट जिला कारागार, सोनभद्र जिला कारागार इसका जीता जागता उदाहरण बनी हुई है।
सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरित अधिकारियों और कर्मियों की जगह अधिकारियों की तैनाती नहीं होने की वजह से दर्जनों की संख्या में अधिकारी रिलीव नहीं हो पा रहे है। स्थानांतरित अधिकारी जब जेल अधीक्षक से रिलीव करने की बात कहते है तो उनका कहना होता है कि प्रस्थानी के आने के बाद ही उन्हें रिलीव किया जाएगा। अधीक्षकों का तर्क है कि प्रस्थानी के नहीं आने पर उनको रिलीव किए जाने से जेल की व्यवस्थाएं चरमरा जाएंगी। स्थानांतरित अधिकारियों को रिलीव करने से जेलों का संचालन करना मुश्किल हो जाएगा। एआईजी प्रशासन के मोटी रकम लेकर किए गए अव्यवस्थित तबादलों से स्थानांतरित अधिकारियों के सामने नई जेल पर प्रभार संभालना तो दूर की बात रिलीव होने का संकट उत्पन्न हो गया है। रिलीव नहीं हो पाने से अधिकारियों में पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। उधर इस संबंध में जब एआईजी कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया।


