कारागार विभाग के तबादलों में चल रहा सेटिंग गेटिंग का खेल!

कोई अलीगढ़, तो कोई फिरोजाबाद, तो कोई बुलंदशहर जाने की जुगाड़ में सत्र से 24 दिन बीतने के बाद भी विभाग में नहीं हुआ एक भी तबादला एक सप्ताह में विभाग में होंगे सैकड़ों अधिकारियों और कर्मियों के स्थानांतरण

कारागार विभाग के तबादलों में चल रहा सेटिंग गेटिंग का खेल!
कारागार मुख्यालय

लखनऊ। कारागार विभाग में जेल अफसरों के कमाऊ जेलों पर तैनाती के लिए सेटिंग-गेटिंग का खेल शुरू हो गया है। फतेहगढ़ और इटावा सेंट्रल जेल अधीक्षक अलीगढ़, मैनपुरी जेल अधीक्षक बुलंदशहर, फतेहगढ़ जिला जेल में अस्थाई ड्यूटी कर रहे फिरोजाबाद, नव प्रोन्नत अधीक्षक मुजफ्फरनगर जेल से बुलंदशहर जेल जाने की फ़िराख में लगे हुए हैं। इसी प्रकार विभाग के अधिकांश अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की निगाहें भी पश्चिम के साथ पूरब की अन्य कमाऊ जेलों पर टिकी हुई हैं। 

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के कारागार विभाग में हर साल शासन की स्थानांतरण नीति की जमकर धज्जियां उड़ाई जाती रही है। इस विभाग एक साल पूर्व स्थानांतरित किए गए अधिकारियों तक का तबादला कर दिया जाता रहा है। जबकि लंबे समय एक ही स्थान पर जमे लोगों को छुआ तक नहीं जाता है। राजधानी की जिला जेल इसका जीता जागता उदाहरण भी है। सूत्रों का कहना है कि करीब चार साल तक राजधानी की जिला जेल में जमें अधीक्षक को बीते स्थानांतरण सत्र में लखनऊ से हटाकर फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेजा गया था। इस स्थानांतरण से पूर्व जेल अधीक्षक आशीष तिवारी मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़ जाने की जुगत में लगे हुए थे लेकिन शासन ने उनके मंसूबों पर पानी फेरते हुए उन्हें फतेहगढ़ सेंट्रल जेल पर स्थानांतरित कर दिया। अब यह अधीक्षक अलीगढ़ जाने की फ़िराख में लगे हुए है। अलीगढ़ के लिए इनकी पूरी सेटिंग-गेटिंग भी हो गई है। इनका तबादला होना लगभग तय भी माना जा रहा है।

मंहगाई की तरह तबादलों के दामों में भी हुई बेतहाशा वृद्धि!
जेल विभाग में पश्चिम और पूरब की जेलों के कोई मानक निर्धारित नहीं है। जो अधिकारी पश्चिम में चला जाता है वह पूरब में लौटना ही नहीं चाहता है। मुजफ्फरनगर जेल में तैनात जेलर का अधिकांश कार्यकाल पश्चिम की जेलों में ही बीता है। पूर्वांचल का रहने वाला यह जेलर प्रमोशन के बाद फिर से पश्चिम की कमाऊ जेल पर तैनात होने की जुगत में लगे हुए हैं। स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ाकर होने वाले यह तबादले विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बने हुए है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि विभाग में मंहगाई की तरह तबादलों के दामों में भी बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। सूत्रों की माने तो अधीक्षक संवर्ग में अस्सी लाख से डेढ़ करोड़, जेलर संवर्ग में चालीस से सत्तर लाख, डिप्टी जेलर संवर्ग में पांच से बीस लाख तक तो हेड वार्डर, वार्डर संवर्ग के लिए एक से डेढ़ लाख तक की मांग की जा रही है।

सूत्र बताते है कि करीब एक दर्जन नव प्रोन्नत अधीक्षक की निगाहें भी पश्चिम की कमाऊ जेलों पर टिकी हुई हैं। इसमें सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का संरक्षण प्राप्त और विवादों से घिरे रहने वाले मुजफ्फरनगर जेल पर तैनात जेलर से अधीक्षक पद पर प्रोन्नत राजेश सिंह और मैनपुरी की कोमल मंगलानी ने पश्चिम की बुलंदशहर जेल के लिए दावेदारी पेश की है। इन दो अधीक्षकों से प्रोन्नत अधीक्षक का बुलंदशहर जेल पर जाना लगभग तय माना जा रहा है। इस कड़ी में फतेहगढ़ जिला जेल पर अस्थाई ड्यूटी कर रहे अधीक्षक अमन सिंह, बस्ती अधीक्षक ने भी फिरोजाबाद जेल के लिए जोड़तोड़ में लगे है। इसमें फतेहगढ़ जेल अधीक्षक का फिरोजाबाद होना तय माना जा रहा है। किस जेल अधीक्षक को कौन सी कमाऊ जेल मिलेगी यह तो आना वाला समय ही बताएगा लेकिन अधीक्षक कमाऊ जेल पर तैनात होने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहे हैं। उधर स्थानांतरण के संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।