कारागार विभाग में इस बार भी होंगे 'पैकेज' पर तबादले!

पिछले स्थानांतरण सत्र में विभाग में हुए थे पैकेज पर तबादले तबादलों को लेकर शासन और मुख्यालय में हुई थी तकरार मंत्री समेत अन्य आला अफसरों की परिक्रमा करने में जुटे अफसर

कारागार विभाग में इस बार भी होंगे 'पैकेज' पर तबादले!
ट्रांसफर

लखनऊ। सरकार की स्थानांतरण नीति के आते ही प्रदेश के कारागार विभाग में तबादलों को लेकर हलचल मची हुई है। विभाग का प्रत्येक अधिकारी और सुरक्षाकर्मी मनमाफिक कमाऊ जेल पर तैनाती कराने की जुगत में लगा हुआ है। विभाग में तबादलों को लेकर कोई नीति निर्धारित नहीं है। पिछले स्थानांतरण सत्र में इस विभाग में पैकेज पर तबादले किए गए थे। संभावना व्यक्त की जा रही है विभाग में इस बार भी पैकेज पर तबादले किए जा सकते है। यह अलग बात है कि विभाग के उच्चाधिकारियों इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे है। 

विभागीय जानकारों के मुताबिक स्थानांतरण नीति 2025-26 के आने के बाद शासन और कारागार मुख्यालय में वरिष्ठ अधीक्षक, अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर के साथ हेड वार्डर वार्डर संवर्ग के स्थानांतरित किए जाने वाले कर्मियों की सूची तैयार करने का काम जोरशोर से चल रहा है। वहीं दूसरी ओर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मनमाफिक कमाऊ जेलों पर तैनाती पाने के लिए विभागीय मंत्री, प्रमुख सचिव, आईजी जेल और परिक्षेत्र के डीआईजी की परिक्रमा करने में लगे हुए हैं।

आईजी जेल को रास नहीं आए पैकेज में हुए तबादले

कारागार मुख्यालय के विभागाध्यक्ष आईजी जेल को पिछले स्थानांतरण सत्र में पैकेज में हुए तबादले रास नहीं आए। तबादले के बाद पश्चिम के एक जेल पर हुई घटना पर आईजी जेल ने जेलर को जौनपुर जेल पर अस्थाई ड्यूटी पर लगा दिया। यह अलग बात है कि यह जेलर एक माह बाद ही अस्थाई ड्यूटी पर मेरठ जेल पहुंच गया। इसी प्रकार मुजफ्फरनगर जेल में पूर्व विधायक को मोबाइल चलाते पकड़ा गया। ऐसा ही मामला गाजीपुर जेल में भी पकड़ा गया। मामले में गाजीपुर जेल अधीक्षक, जेलर समेत तीन लोगों को निलंबित कर दिया गया, जबकि मुजफ्फरनगर जेल पर अधीक्षक तो छोड़िए किसी भी जेल अधिकारी के खिलाफ आज तक कोई का कार्यवाही नहीं की गई।

सूत्रों का कहना है कि कारागार विभाग के स्थानांतरण में सरकार की स्थानांतरण नीति में जनपद में तीन और मंडल में सात साल पूरे करने वाले अधिकारियों और कर्मियों के तबादले किए जाने का निर्देश दिया गया। ऐसा ही बीते साल जारी की गई स्थानांतरण नीति में भी कहा गया था। इस निर्देशों के बावजूद विभाग में एक दो साल पहले तैनात किए गए अधिकारियों कर्मियों को स्थानांतरित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि बीते सत्र में आधा दर्जन अधिकारियों ने मिलकर मोटा पैकेज देकर मनमाफिक कमाऊ जेलों पर तबादले करवाए थे। चर्चा है कि इस बार भी पैकेज पर तबादले होने की संभावना से नकारा नहीं जा सकता है। उधर इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। विभाग के आला अफसरों ने इसे मंत्री और शासन का मामला बताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।