कारागार मंत्री के चलते धरी रह गई जेल मुख्यालय की क्रय नीति!
विभाग में गेहूं-चावल की खरीद में चल रहा कमिशन का बड़ा खेल क्रय नीति के बाद भी कल्याण निगम से हो रही खरीद फरोख्त मोटे कमिशन की खातिर चहेते ठेकेदारों से कराई जा रही गेहूं- चावल की आपूर्ति
लखनऊ। कारागार विभाग में बंदियों का भोजन भी विभाग के आला अफसरों की कमाई का जरिया बन गया है। जेलों में गेहूं- चावल की आपूर्ति में मोटी कमाई की जा रही है। मोटे कमिशन की खातिर विभागीय अधिकारियों की क्रय नीति बनने के बावजूद गेहूं-चावल की आपूर्ति कल्याण निगम से ही कराई जा रही है। जेलों में बाजार से अधिक दाम पर आपूर्ति किए जाने वाले गेहूं-चावल का यह मामला जेल अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि अपरोक्ष रूप से मोटे कमिशन और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए क्रय नीति तैयार होने के बाद भी जेलों में गेहूं और चावल कल्याण निगम के माध्यम से कराकर सरकार को प्रतिमाह लाखों रुपए के राजस्व का चुना लगाया जा रहा है। इस खरीद फरोख्त की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश की जेलों में निरुद्ध बंदियों के भोजन के लिए गेहूं-चावल की आपूर्ति कल्याण निगम से कराई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि बाजार में गेहूं और चावल का दाम अधिक होने पर कल्याण निगम इसको आपूर्ति करने में आनाकानी करता है। गेहूं-चावल की आपूर्ति का कार्य बाधित होने से जेल अधिकारियों को तमाम तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। कल्याण निगम से गेहूं-चावल नहीं मिलने पर जेल प्रशासन के अधिकारियों को गेहूं-चावल की आपूर्ति स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से करानी पड़ती है। इससे जेल अधिकारियों को अनाप शनाप दामों पर खरीदने के विवश होना पड़ता है। इससे खासे राजस्व का नुकसान होता है।
सूत्रों की माने तो इस समस्या के निदान के लिए कारागार मुख्यालय ने गेहूं-चावल की खरीद खुद करने का निर्णय लिया। विभाग ने गेहूं-चावल की खरीद के लिए दर्जनों को संख्या में बैठके कर क्रय नीति तैयार करवाई। मैराथन बैठकों में विचार विमर्श के बाद गेहूं-चावल की खरीद फरोख्त के तैयार की गई क्रय नीति को अनुमोदन के लिए शासन को भेजा गया। सूत्र बताते है कि शासन ने मुख्यालय की तैयार क्रय नीति को मंजूरी के लिए विभागीय कारागार मंत्री को भेजा। सूत्रों का कहना है कि कारागार मंत्री ने दर्जनों मैराथन बैठके कर तैयार की गई क्रय नीति को नामंजूर करते हुए गेहूं- चावल की आपूर्ति कल्याण निगम से ही कराए जाने का निर्देश देकर विभागीय अधिकारी के कमीशनखोरी पर लगाम लगाए जाने के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
बाजार रेट से अधिक दाम पर खरीदा जा रहा गेहूं चावल!
कारागार विभाग में प्रदेश की जेलों में गेहूं चावल की आपूर्ति मनमाफिक दामों पर करके सरकार का मोटे राजस्व का चुना लगाया जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान समय में बाजार में जो गेहूं खुलेआम 22 से 25 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है। इसी प्रकार चावल 25 से 30 रुपए में बेचा जा रहा है। वहीं गेहूं प्रदेश की जेलों में 32 से 35 रुपए में और चावल 35 से 37 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से आपूर्ति की जा रही है। इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कारागार मुख्यालय ने गेहूं चावल की क्रय नीति तैयार की थी। इस नीति को मंजूरी न देकर गेहूं चावल की आपूर्ति कल्याण निगम से ही कराई जा रही है।
सूत्रों की माने तो विभागीय मंत्री, पूर्व मंत्रियों के कई चहेते ठेकेदार प्रदेश की जेलों में गेहूं-चावल के साथ दाल इत्यादि की आपूर्ति कर रहे है। बताया गया है कारागार विभाग के पूर्व राज्यमंत्री का एक ठेकेदार फतेहपुर की एक फर्म से आज भी राजधानी की जिला जेल में दाल, मस्टर्ड और रिफाइंड ऑयल की मनमाने दामों पर आपूर्ति कर रहा है। उधर इस संबंध में जब प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा। कारागार मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गेहूं चावल की खरीद के लिए क्रय नीति तैयार कर शासन को भेजे जाने की पुष्टि तो की लेकिन इसके अलावा और कुछ भी बताने से साफ मना कर दिया।


