गौरवशाली विरासत का प्रतिनिधित्व करता बंगाली समुदाय: बंदोपाध्याय
बंगाली नववर्ष "पोहेला बोइशाख" पर हुई सांस्कृतिक संध्या
लखनऊ। प्रवासी बंगीय सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में रामनवमी के पावन अवसर पर बंगाली नववर्ष "पोहेला बोइशाख" का भव्य आयोजन रवीन्द्रालय में रविवार को आयोजित किया गया। आयोजन केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी परिपूर्ण रहा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ 'लाड़ली कन्या विवाह' से हुआ। जिसमें संस्था ने 11 निर्धन कन्याओं का विवाह सादगी, गरिमा और आत्मीयता के साथ संपन्न कराया। नवविवाहितों को वस्त्र, बर्तन और गृहस्थ जीवन की प्रारंभिक आवश्यक सामग्री भेंट की गई। उनके परिजनों सहित 250 से अधिक लोगों के लिए विशेष भोज की भी व्यवस्था की गई। सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन विधायक डॉ. नीरज बोरा एवं विधायक पी. श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन कर किया। स्वागत समिति के अध्यक्ष सौरभ बंदोपाध्याय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.एन. पाल, महामंत्री अर्चना दत्ता (डिम्पल) एवं सहायक महामंत्री संदीप अधिकारी ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत रुद्र कला अकादमी द्वारा गणेश वंदना से हुई, जिसके बाद महिला प्रकोष्ठ ने दुर्गा वंदना और महिषासुर मर्दिनी की भावनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। पारंपरिक बंगाली साड़ी में सजी महिलाओं द्वारा सांस्कृतिक रैम्प वॉक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात कोलकाता की सुप्रसिद्ध गायिका आहाना चटर्जी और मुंबई के रजोश्री शील ने रवींद्र संगीत एवं लोकप्रिय हिंदी गीतों की मधुर प्रस्तुतियाँ दीं। अंत में लकी ड्रा और मिष्ठान्न वितरण ने उत्सव को और भी यादगार बना दिया।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष सौरभ बंदोपाध्याय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस. एन. पाल, महामंत्री अर्चना दत्ता एवं उप महामंत्री संदीप अधिकारी ने कहा कि बंगाली समुदाय एक गौरवशाली विरासत का प्रतिनिधित्व करता है,जहां के वीर सपूतों ने देश की आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई एवं सबसे ज्यादा बलिदान दिया। सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी आदि बहुत सारे उदाहरण है। सुभाष चंद्र बोस का आजादी में योगदान देश कभी नही भूल सकता, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की जो आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीति पार्टी है। रविंद्र नाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद इसी समाज से हुए है। समिति के प्रवक्ता ने आगे कहा कि लखनऊ में आज करीब 8-10 लाख बंग समाज के लोग रहते है इसी तरह प्रदेश में इनकी संख्या करोङो में होगी लेकिन इस समाज को किसी भी सरकार में अपना हक कभी नही मिला। अल्पसंख्यक होते हुए भी इस समाज के लोगो के अछूत समझा गया। इस समाज से कभी भी अल्पसंख्यक आयोग में नामित नही किया गया न ही सभासद नामित किया गया न ही बंगाली आयोग की स्थापना की गई। समिति ने मांग रखी कि इस समाज को भी शासन में उचित प्रतिनिधित्व जरूर दिया जाना चाहिए।


