कारागार विभाग में स्थानांतरण नीति की फिर उड़ेगी धज्जियां, अधीक्षकों की कमाऊ जेलों में तैनाती के प्रयास जारी

फतेहगढ़ सेंट्रल जेल के अधीक्षक अलीगढ़ जेल जाने की फिराख में 11 माह पहले ही लखनऊ जेल से हुआ था फतेहगढ़ सेंट्रल जेल तबादला नव प्रोन्नत आधा दर्जन अधीक्षकों की निगाहें भी टिकी पश्चिम की जेलों पर

कारागार विभाग में स्थानांतरण नीति की फिर उड़ेगी धज्जियां, अधीक्षकों की कमाऊ जेलों में तैनाती के प्रयास जारी
कारागार मुख्यालय ट्रांसफर

...तो तबादले से पहले तय हो गई अधीक्षकों की कमाऊ जेलें!

लखनऊ। स्थानांतरण सत्र शुरू होते ही कारागार विभाग में जेल अफसरों के कमाऊ जेलों पर तैनाती के लिए सेटिंग-गेटिंग का खेल शुरू हो गया है। करीब 11 माह पूर्व राजधानी की जिला जेल से फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेजे गए अधीक्षक अलीगढ़ जाने की फ़िराख में लगे हुए है। करीब चार साल तक लखनऊ जेल पर तैनात रहकर लूट मचाने वाले अधीक्षक का तबादला पिछले स्थानांतरण सत्र में ही किया गया गया था। बीते स्थानांतरण सत्र में इनके पश्चिम की कमाऊ वाली मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद जेल पर जाने के मंसूबों पर शासन ने पानी फेर दिया था। एक बार फिर वह अलीगढ़ जाने की जुगत में लगे हुए है। इसी प्रकार कुछ प्रोन्नत अधीक्षकों की निगाहें भी पश्चिम की कमाऊ जेलों पर टिकी हुई हैं। कुछ नव प्रोन्नति अधीक्षकों ने तो इसके लिए पूरी तरह से सेटिंग-गेटिंग कर एडवांस तक जमा कर दिया है। 

बीते दिनों सरकार की जारी स्थानांतरण नीति में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जनपद में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष पूरा कर चुके अधिकारियों और कर्मियों को ही स्थानांतरित किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के कारागार विभाग में हर साल शासन की स्थानांतरण नीति की जमकर धज्जियां उड़ाई जाती रही है। इस विभाग एक साल पूर्व स्थानांतरित किए गए अधिकारियों तक का तबादला कर दिया जाता रहा है। जबकि लंबे समय एक ही स्थान पर जमे लोगों को छुआ तक नहीं जाता है। राजधानी की जिला जेल इसका जीता जागता उदाहरण भी है। सूत्रों का कहना है कि करीब चार साल तक राजधानी की जिला जेल में जमें अधीक्षक को बीते स्थानांतरण सत्र में लखनऊ से हटाकर फतेहगढ़ सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया था। स्थानांतरण से पूर्व जेल अधीक्षक मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़ जाने की जुगत में लगे हुए थे लेकिन शासन और विभागीय मंत्री ने उनके मंसूबों पर पानी फेरते हुए उन्हें फतेहगढ़ सेंट्रल जेल पर स्थानांतरित कर दिया। करीब 11 माह पहले स्थानांतरण पर फतेहगढ़ सेंट्रल जेल आए अधीक्षक अब अलीगढ़ जाने की फ़िराख में लगे हुए है। अलीगढ़ के लिए इनकी पूरी सेटिंग-गेटिंग भी हो गई है। इनका तबादला होना लगभग तय भी माना जा रहा है।

जेल विभाग में फिर उड़ेगी स्थानांतरण नीति की धज्जियां!
जेल विभाग में पश्चिम और पूरब की जेलों के कोई मानक निर्धारित नहीं है। जो अधिकारी पश्चिम में चला जाता है वह पूरब में लौटना ही नहीं चाहता है। मुजफ्फरनगर जेल में तैनात जेलर का अधिकांश कार्यकाल पश्चिम की जेलों में ही बीता है। पूर्वांचल का रहने वाला यह जेलर प्रमोशन के बाद फिर से पश्चिम की कमाऊ जेल पर तैनात होने की जुगत में लगा है। करीब 11 माह पूर्व गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा समेत अन्य कई जेलों में नए अधीक्षक तैनात किए गए थी। अभी इन अधीक्षकों को एक साल भी नहीं हुआ कि इन्हें हटाए जाने की कवायद चल रही है। स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ा कर होने वाले यह तबादले विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बने हुए है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि इस विभाग में स्थानांतरण नीति को दरकिनार कर तबादले किए जाते है। इस विभाग में उगाही के आगे स्थानांतरण नीति का कोई मायने नहीं रह गया है।

सूत्रों की माने तो यही नहीं करीब आधा दर्जन नव प्रोन्नत अधीक्षक की निगाहें भी पश्चिम की कमाऊ जेलों पर टिकी हुई हैं। इसमें सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का संरक्षण प्राप्त और विवादों से घिरे रहने वाले मुजफ्फरनगर जेल पर तैनात अधीक्षक पद पर प्रोन्नति के प्रबल दावेदार अधिकारी ने पश्चिम में कमाऊ माने जाने वाली गौतमबुद्धनगर (नोएडा), गाजियाबाद और बुलंदशहर जेल के लिए दावेदारी पेश की है। चर्चा है कि गाजियाबाद और नोएडा जेल में बीते स्थानांतरण सत्र के दौरान ही अधीक्षक तैनात किए गए। इससे बुलंदशहर जेल पर इनकी तैनाती होना लगभग तय माना जा रहा है। इसी प्रकार करीब आधा दर्जन प्रोन्नत अधीक्षकों की निगाहें भी पश्चिम की जेलों पर लगी हुई है। किस अधीक्षक को किस जेल पर तैनाती मिलेगी यह तो आना वाला समय ही बताएगा लेकिन अधीक्षक कमाऊ जेल पर तैनात होने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाह रहे हैं। उधर स्थानांतरण के संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।