बगैर रेट वेरिफिकेशन कराए हो रहा ठेकेदारों का भुगतान!

बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर खरीदा गया उद्योगों का रॉ मैटेरियल कमाई के चक्कर में फाइलों में सिमटा पूर्व अधीक्षक का निर्देश अफसरों की कमाई का जरिया बनी कैदी पुनर्वास की योजनाएं

बगैर रेट वेरिफिकेशन कराए हो रहा ठेकेदारों का भुगतान!
जेल मुख्यालय

आदर्श कारागार के प्रभारी अधीक्षक का कारनामा

लखनऊ। प्रदेश कारागार विभाग की महिमा अपरंपार है। इस विभाग में आला अफसरों के निर्देश की बात तो छोड़िए अधिकारी अपने साथी अधिकारी तक की बात नहीं मानते है। यही वजह है कि एक अधीक्षक ने रेट वेरिफिकेशन कराकर भुगतान करने का निर्देश दिया तो दूसरे अधीक्षक ने निर्देशों को दर किनार कर ठेकेदार का भुगतान कर दिया। नौ की लकड़ी नब्बे खर्च के नाम हुए भुगतान का यह मामला जेलकर्मियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगी जा रही है। चर्चा है कि कमाई के लिए जेल अधिकारी किसी भी हद तक जा सकते है। 

मामला राजधानी की आदर्श कारागार का है। यह जेल प्रदेश की एकमात्र ऐसी जेल है जहां पर प्रदेश भर की जेलों से चयनित फर्स्ट अफेंडर कैदियों को ही रखा जाता है। इस जेल में कैदियों के पुनर्वास के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है। इसके तहत जेल में प्रिंटिंग प्रेस, पावरलूम, सिलाई, बेकरी सरीखे कई उद्योग संचालित किए जा रहे है। इनमें काम करके कैदी विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन कर पारिश्रमिक हासिल करते है। इससे वह स्वावलंबी बनने के साथ घर तक का खर्च चलाते है। कैदी पुनर्वास की यह योजना जेल अधिकारियों की कमाई का जरिया बनकर रह गई है।

झूठ बोलते अधीक्षक,अभी तक रिलीव नहीं हुआ डिप्टी जेलर

बीती 11 मार्च 2025 को आईजी जेल पीवी रामाशास्त्री के निर्देश पर एआईजी प्रशासन धर्मेंद्र सिंह ने आदर्श कारागार में तैनात डिप्टी जेलर अजीत सिंह को हटाए जाने का आदेश जारी किया। मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में डिप्टी जेलर अजीत सिंह को अग्रिम आदेश तक के लिए श्रावस्ती जेल पर अस्थाई ड्यूटी के लिए लगाया गया। जेल पर आदेश आए हुए करीब दस दिन का समय बीत चुका है। आईजी जेल के आदेश के बावजूद अस्थाई ड्यूटी पर लगाए गए डिप्टी जेलर को अभी तक रिलीव नहीं किया है। इस संबंध में करीब एक सप्ताह पूर्व प्रभारी अधीक्षक बृजेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि डिप्टी जेलर को जल्दी रिलीव कर दिया जाएगा। इसके बाद भी उसको अभी तक रिलीव नहीं किया गया है। चर्चा है कि अधीक्षक ने उन्हें कमाई के लिए रोक रखा है।

आदर्श कारागार में संचालित उद्योगों के लिए ठेकेदारों के माध्यम से रा मटेरियल मसलन प्रिंटिंग इंक, ग्रीस, मोबाइल ऑयल, बैंडिंग क्लॉथ, अबरी पेपर, दफ्ती, कपड़े सिलने का धागा सरीखे तमाम आइटमों की आपूर्ति कराई जाती है। सूत्रों का कहना है कि इन आइटमों की खरीद बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर की जा रही है। मसलन बाजार में 25 रुपए मीटर मिलने वाला वाइंडिंग क्लॉथ 65 से 75 रुपए मीटर खरीदा जा रहा है। इसी प्रकार 600 रुपए में मिलने वाला अबरी पेपर 2500 रुपए में, 12 रुपए में मिलने वाला कपड़ा सिलने वाला धागा 36 रुपए में एवं प्रिटिंग प्रेस के लिए आने वाले आइटमों को बाजार से 50 से 75 प्रतिशत अधिक दामों पर आपूर्ति कराई जा रही है। बेतहाशा दामों पर हो रही इस आपूर्ति की शिकायत मिलने पर पूर्व जेल अधीक्षक ने रेट वेरिफिकेशन कराने की बात कहकर भुगतान को रोक दिया था। इसके साथ ही यह निर्देश फाइलों में भी दर्ज कर दिया था। इस दौरान उनका तबादला कर दिया गया।

कन्नौज जेल के दोषियों पर नहीं हुई कोई कार्रवाई

कन्नौज जिला जेल में बंद सपा नेता एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव और उसके भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख नीलू यादव को अनाधिकृत मुलाकात करने के आरोप में जेल तो बदल दी गई लेकिन मुलाकात कराने वाले अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और मुलाकात पर्ची के ठेकेदार के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अनाधिकृत मुलाकात करने वाले बंदी नवाब सिंह को बांदा और नीलू यादव को कौशांबी जेल भेजा गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व मुरादाबाद जेल में सपा के पूर्व सांसद की अनाधिकृत मुलाकात कराने का मामला सुर्खियों में आने के बाद कारागार मुख्यालय ने आनन फानन में जेलर विजय विक्रम यादव और मुलाकात प्रभारी डिप्टी जेलर को तत्काल निलंबित कर दिया था। इसके कुछ दिनों बाद ही शासन ने जेल अधीक्षक पी पी सिंह को भी निलंबित कर दिया था। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद भी शासन और मुख्यालय ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

सूत्रों का कहना है कि पूर्व अधीक्षक के निर्देश के बाद भी प्रभारी जेल अधीक्षक ने ठेकेदारों के आपूर्ति किए गए सामनों के रेट का वेरिफिकेशन नहीं कराया है। रेट वेरिफिकेशन कराए जाने की बात तो छोड़िए ठेकेदारों के बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर आपूर्ति किए गए सामनों के लिए कई ठेकेदारों का भुगतान भी कर दिया गया है। सरकार के राजस्व को मोटा चुना लगाकर ठेकेदारों के भुगतान का सिलसिला अभी भी बदस्तूर जारी है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करा दी जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। उधर इस संबंध में आदर्श कारागार का कोई भी अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचता नजर आया। वर्तमान समय में इस जेल का प्रभार तीन उधार के अधिकारियों के पास है। जेल पर किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की तैनाती नहीं है।