कारागार विभाग में फिर मिला दागदार अफसर को प्रमोशन

भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम की मुहिम पर पलीता लगा रहे अफसर लखनऊ जेल में चार साल के कार्यकाल में रहा घटनाओं का अंबार

कारागार विभाग में फिर मिला दागदार अफसर को प्रमोशन
आदर्श कारागार लखनऊ

लखनऊ। भ्रष्टाचार को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सख्त रवैए के बाद प्रदेश कारागार विभाग के आला अफसर सुधरने का नाम नहीं ले रहे है। इस विभाग में भ्रष्टाचारी अफसरों पर कार्रवाई करने के बजाए उन्हें अलंकृत किया जा रहा है। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब आने वाले समय में भ्रष्टाचारी अफसरों को सम्मानित किया जाएगा। विभाग में ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। विभाग के आला अफसरों ने एक दागदार को सुपर रिन की चमकार से धोकर दागदार अधिकारी को बेदाग कर प्रोन्नति प्रदान कर दी। यह मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। 

बीती 21 मार्च को कारागार विभाग में वरिष्ठ अधीक्षक ग्रेड वन से ग्रेड टू पद पर प्रोन्नति को लेकर विभागीय प्रोन्नति कमेटी (डीपीसी) हुई। इस प्रोन्नति कमेटी की बैठक में एक ऐसे अधीक्षक को प्रोन्नति प्रदान कर दी गई जिसका दामन दागों से भरा हुआ रहा। भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमिताओं के लिए इन्हें कई बार दोषी तक ठहराया गया। एक मामले में तो इस अधिकारी के खिलाफ निलंबन की संस्तुति तक की गई लेकिन विभाग के आला अफसरों ने इन सभी मामलों में इस दोषी अधिकारी को क्लीन चिट देकर आखिकार वरिष्ठ अधीक्षक ग्रेड टू पर प्रोन्नति प्रदान ही कर दी गई। प्रोन्नति सूची में इस अधिकारी के नाम को देखकर विभाग के कई अधिकारी सकते में आ गए। दागदार अफसर की प्रोन्नति को लेकर अधिकारी यह कहते हुए भी नजर आ रहे है कि समरथ को नहीं कोई दोष गोसाई।

प्रोन्नति में पहले भी हो चुके बड़े खेल

प्रदेश के कारागार विभाग में प्रोन्नति को लेकर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी दागदार अफसरों को प्रोन्नति प्रदान की जा चुकी है। कैदी की समयपूर्व रिहाई को लेकर शासन को एक गलत प्रस्ताव भेजने वाले अधीक्षक को निलंबित कर दिया है, वही ऐसे ही दो गलत प्रस्ताव भेजने वाले वरिष्ठ अधीक्षक ग्रेड टू को प्रोन्नति देकर डीआईजी बना दिया गया। इसी प्रकार प्रदेश के बहुचर्चित शाइन सिटी मामले की पावर ऑफ अटॉर्नी को जेल से बाहर भेजवाने के आरोप में दोषी पाए गए डिप्टी जेलर को जेलर पद पर प्रोन्नत कर दिया गया। यह तो बानगी है इस प्रकार के कई मामले विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीपीसी में एक ऐसे वरिष्ठ अधीक्षक ग्रेड वन को प्रोन्नति प्रदान की गई जिसके लखनऊ जेल के करीब चार साल के कार्यकाल में घटनाओं की भरमार रही। प्रदेश के बहुचर्चित शाइन सिटी की पावर ऑफ अटॉर्नी की जांच में तत्कालीन डीआईजी ने वरिष्ठ अधीक्षक समेत चार दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। घटना के लिए वरिष्ठ अधीक्षक के निलंबन की भी संस्तुति की गई थी। इसी प्रकार जेल के गल्ला गोदाम से 35 लाख नगद धनराशि बरामद होने पर इन्होंने एक लाख 21 हजार रुपए बरामद होने की बात स्वीकार भी की थी। जेल में नगद धनराशि होना ही अपराध की श्रेणी में आता है। इस मामले भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी प्रकार ढाका से वाया कोलकाता होते हुए जेल में बंद बांग्लादेशी बंदियों की फंडिंग के मामले की जांच एटीएस ने करीब एक माह से अधिक समय तक की थी। इस जांच में जेल के कई अधिकारियों और कर्मियों के बैंक खातों में पैसा आने तक की पुष्टि हुई थी। एटीएस की जांच रिपोर्ट में वरिष्ठ अधीक्षक समेत अन्य कर्मियों को दोषी ठहराया गया था। इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा एक बंदी की गलत रिहाई के मामले एडीजे इटावा की जांच में वरिष्ठ अधीक्षक को दोषी ठहराते हुए इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की गई थी। इस मामले को भी दबा दिया गया। इसी प्रकार जेल के अंदर बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के मोबाइल फोन से वाराणसी के एक व्यवसाई को धमकी दिए जाने के मामले में वरिष्ठ अधीक्षक को दोषी ठहराया गया था। धमकी का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। इसमें भी कोई कार्यवाही नहीं की है। ऐसे दागदार अफसरों को प्रोन्नति देना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस संबंध में कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान और प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई। मैसेज का उन्होंने कोई जवाब ही नहीं दिया।