कारागार मुख्यालय के बाबू ने किया आईजी को गुमराह!

मुख्यालय से हटाकर बाबू भेजा गया गोरखपुर परिक्षेत्र कार्यालय आधुनिक उपकरणों के मेंटीनेंस (एएमसी) को लेकर लेकर गोलमाल आधुनिकीकरण अनुभाग में काफी लंबे समय से जमा था बाबू

कारागार मुख्यालय के बाबू ने किया आईजी को गुमराह!
कारागार मुख्यालय

लखनऊ। प्रदेश की जेलों में लगे अत्याधुनिक उपकरणों की एएमसी (एनुअल मेंटीनेंस कॉन्ट्रैक्ट) के बजट आवंटन को लेकर एक बाबू ने आईजी जेल को गुमराह कर दिया। बाबू के गोलमाल इस से नाराज आईजी जेल ने बाबू को मुख्यालय से हटाकर गोरखपुर जेल परिक्षेत्र कार्यालय भेज दिया है। अचानक हुई इस कार्रवाई को लेकर मुख्यालय कर्मियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि आधुनिकीकरण अनुभाग से जुड़े बाबू ने कमाई बढ़ाने के लिए इस खेल को अंजाम देने का प्रयास किया। 

प्रदेश के जेलों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए शासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए है। इसके लिए प्रतिवर्ष करोड़ो रुपए का बजट आवंटित किया जाता है। बजट खपत के लिए मुख्यालय में आधुनिकरण अनुभाग बनाया गया है। यह अनुभाग जेलों के लिए सीसीटीवी, मेटल डिटेक्टर, वाकी टॉकी, बॉडी स्कैनर सरीखे आधुनिक उपकरण खरीद कर लगवाता है। इन उपकरणों की देखभाल और मेंटीनेंस की जिम्मेदारी भी इसी अनुभाग की होती है। जेलों की सुरक्षा और चौकस निगरानी के लिए बनाया गया यह अनुभाग अधिकारियों की कमाई का जरिया बनकर रह गया है। वर्तमान समय में इस अनुभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने लूट मचा रखी है।

सूत्रों का कहना है कि जेल में घटनाओं के समय करोड़ों रुपए की लागत से लगाए गए अधिकांश उपकरण खराब ही मिलते है। उपकरणों के खराब होने की वजह से जेल प्रशासन के अधिकारियों को तमाम तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसके निस्तारण के लिए आईजी जेल ने एएमसी का बजट जेलों को आवंटित करने का निर्णय लिया। 

जेल गोदामों में धूल फांक रहे करोड़ों के आधुनिक उपकरण

मोटा कमिशन पाने की खातिर मुख्यालय के आधुनिकीकरण अनुभाग के अधिकारी और बाबू बेलगाम हो गए हैं। अधिकारियों ने बाबुओं से साठ-गांठ करके जेलों में लाखों रुपए के तमाम ऐसे उपकरणों और सामनों की आपूर्ति का डाली जो जेलों में आवश्यकता ही नहीं थी। मसलन हाल ही में दस जेलों में करोड़ों रुपए की लागत से खरीदी गई हैवी ड्यूटी वाशिंग मशीनों की आपूर्ति की है। पूर्व में आपूर्ति की गई वाशिंग मशीन चालू नहीं हो पाई थी कि नई मशीनों की आपूर्ति कर दी गई। यह तो बानगी है। इस प्रकार तमाम ऐसे उपकरण और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति कर दी गई जो जेलों में पहले से मौजूद है। आपूर्ति के लिए खरीदे गए लाखों के उपकरण और सामान जेलों के गोदाम में धूल फांक रहे हैं।

सूत्र बताते कि आईजी जेल ने अनुभाग के बाबू शिवांशु गुप्ता को एएमसी बजट जेलों को आवंटित करने के लिए एक पत्र तैयार करने का निर्देश दिया। बाबू ने तैयार किए पत्र में उपकरणों का मेंटीनेंस संस्था से कराए जाने की बात देखकर आईजी भड़क गए। उन्होंने फटकार लगाते हुए निलंबन से लेकर बर्खास्त किए जाने तक की धमकी दे डाली। अनुभाग के प्रभारी डीआईजी ने हस्तक्षेप कर मामले को किसी तरह शांत करा दिया। यह मामला अभी निपट ही पाया था कि एक नया मामला सामने आ गया। अनुभाग के इस बाबू ने बगैर औपचारिकताएं पूरी करे ही अपने चहेते ठेकेदार को एल-वन बताते हुए ठेका आवंटित कर दिया। इसकी शिकायत होने पर आईजी ने आनन फानन में दो मामलों में दोषी पाए गए बाबू को मुख्यालय से हटाकर अस्थाई ड्यूटी पर गोरखपुर जेल परिक्षेत्र के कार्यालय में लगा दिया है। उधर मुख्यालय के अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।