पिस्टल और कारतूस हजम कर गए लखनऊ जेल अफसर!

मुख्तार के शूटर जीवा की हत्या के लिए मंगाई गई थी पिस्टल उच्च सुरक्षा बैरेक के सामने वाले बाग की खुदाई में मिली पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामदगी को छह माह तक दबाए रहा लखनऊ जेल प्रशासन मृतक अपराधी अंशु दीक्षित ने मंगाई थी जेल में पिस्टल

पिस्टल और कारतूस हजम कर गए लखनऊ जेल अफसर!
लखनऊ जेल

लखनऊ। छोटी छोटी घटनाएं छिपाने में माहिर राजधानी की जिला जेल के अधिकारी पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद होने की सूचना तक को ही छिपा गए। यह बात सुनने और पढ़ने में भले ही चौंकाने वाली लगे लेकिन घटना सत्य है। जेल अधिकारी घटना पुरानी होने की बात कहकर इस सनसनीखेज मामले को दबाने में जुटे रहे।

मिली जानकारी के मुताबिक वाकया वर्ष 2019-20 का है। तत्कालीन जेल अधीक्षक पीएन पांडेय के कार्यकाल में जेल में बंद मुख्तार अंसारी के शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या के लिए शातिर अपराधी अंशु दीक्षित ने जेल में पिस्टल और जिंदा कारतूस मंगवाए थे। जेल सुरक्षाकर्मी के माध्यम से मंगाई गई पिस्टल और कारतूस जेल के अंदर आने की भनक जेल के मुखबिरों (राइटर बंदियों) के माध्यम से जेल प्रशासन के अधिकारियों को लग गई थी।

पिस्टल बरामदगी को छिपाते रहे जेल अधीक्षक
जेल की उच्च सुरक्षा बैरेक के सामने बनी बाग से पिस्टल और कारतूस बरामद होने के संबंध में जब जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वह जेल में ही बैठे हुए थे ऐसी कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रभार संभालने वाले जेलर ऋतिक प्रियदर्शी इन दिनों अवकाश पर है। उनका प्रभार जेलर मृत्युंजय पांडेय को सौंपा गया है। जेलर मृत्युंजय पांडे, चीफ हेड वार्डर के पिस्टल और कारतूस बरामद करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह काफी पुराना मामला है, जीवा और अंशु दीक्षित की मौत हो चुकी है। जेल से कोई पिस्टल और कारतूस बरामद होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

सूत्र बताते है इसकी जानकारी होने पर जेल प्रशासन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने पिस्टल और कारतूस बरामदगी के जेल अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की कई टीम गठित कर इसकी खोज शुरू कर दी। जेल की उन सभी जगहों की सघन तलाशी कराई गई जिन स्थानों पर पिस्टल और कारतूस छिपाए जाने की संभावना थी। इसके लिए अत्याधुनिक उपकरणों (स्वा डिटेक्टर) का भी सहारा लिया गया। लंबे समय तक खोजबीन करने के बाद भी जेल प्रशासन को पिस्टल और कारतूस बरामद नहीं हुए। इसके बाद इस गंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि घटना के बाद शातिर अपराधी अंशु दीक्षित का चित्रकूट जेल तबादला कर दिया गए। चित्रकूट जेल में हुई गैंगवॉर में मुख्तार के शूटर मुनीम काला एक अन्य अपराधी के साथ अंशु दीक्षित की मौत हो गई। इसके कुछ समय बाद ही न्यायालय परिसर में मुख्तार के शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इनकी मौत के बाद जेल प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली और पूरे घटनाक्रम को ही भूल गए।

तत्कालीन वरिष्ठ अधीक्षक ने पुराना मामला कहकर झाड़ा पल्ला 
जेल में पिस्टल और कारतूस आने के समय में तैनात तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक (वर्तमान में डीआईजी आगरा/मुख्यालय) प्रेमनाथ पांडेय से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मामला काफी पुराना है। उन्हें याद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आप भी पुराने गड़े मुद्दे उखड़ते रहते हैं। इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इन्हीं के कार्यकाल में तैनात एक अन्य अधिकारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मुखबिरों से सूचना मिली थी कि जेल में पिस्टल और कारतूस आए है। इसकी लंबे समय तक खोजबीन भी की गई थी, लेकिन इसकी बरामदगी नहीं हुई थी। उधर जेल में बंद कुछ बंदियों ने भी पिस्टल और कारतूस बरामद होने की पुष्टि करते हुए कहा कि जेल अधिकारी तो छिपाएंगे ही। यह बात जेल में अधिकांश बंदियों को मालूम भी है। जेल से पेशी पर आए बंदियों ने इस बरामदगी की पुष्टि की है।

सूत्र बताते है कि बीते पांच दिसंबर 2024 को राजधानी की जिला जेल में हर दिन की तरह साफ सफाई, बागवानी, खेती का काम कराने के लिए बंदियों की कमान निकाली गई। कमान की एक टोली को खेती के लिए हाई सिक्योरिटी बैरेक के सामने बनी बगिया में काम करने के लिए भेजा गया। चीफ हेड वार्डर के निर्देश पर बंदीरक्षक की निगरानी में काम कर रही कमान के बंदियों को बाग की खुदाई में एक पिस्टल और पॉलीथिन में लिपटे छह जिंदा कारतूस मिले। इस बरामदगी से कमान के बंदियों में खलबली मच गई। उन्होंने इसकी सूचना बंदीरक्षक के माध्यम से चीफ हेड वार्डर और चीफ वार्डर ने इसकी सूचना जेल प्रशासन का प्रभार देख रहे जेलर मृत्युंजय पांडेय को दी। सूचना मिलते ही जेलर ने मौके पर पहुंचकर पिस्टल और कारतूस को अपने कब्जे में लिया और इसकी सूचना जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह को दी। सूत्रों का कहना है कि जेल अधीक्षक ने मातहतों को निर्देशित किया कि जो हो गया उसको भूल जाओ इसकी किसी को भी भनक नहीं लगनी चाहिए। उन्होंने मातहत सुरक्षाकर्मियों को यहां तक हिदायत दी कि यदि इसकी सूचना बाहर पहुंची तो वह लोग अपना बोरिया बिस्तर बांध ले। इन हिदायतों के बाद मौके पर मौजूद जेलर, चीफ वार्डर, कमान की निगरानी करने वाला बंदीरक्षक समेत पूरा जेल प्रशासन इस सनसनीखेज मामले को ही हजम कर गया। इस घटना को जेल प्रशासन के अधिकारी छह माह तक दबाए रहे। इस सनसनीखेज बरामदगी का खुलासा पेशी पर आए बंदियों से हुआ।