ज्ञान से आत्मनिर्भरता तक” — आई.टी. कॉलेज में गूँजी वित्तीय साक्षरता की आवाज़
विश्व निवेशक सप्ताह 2025 के अंतर्गत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा भारतीय राष्ट्रीय शेयर बाज़ार (NSE) द्वारा आई.टी. कॉलेज, लखनऊ में महिलाओं के लिए एक क्षेत्रीय निवेशक जागरूकता संगोष्ठी (RISA) का आयोजन किया गया। यह सत्र महिलाओं में वित्तीय साक्षरता, निवेश जागरूकता एवं आर्थिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संपन्न हुआ।
लखनऊ, 9 अक्टूबर 2025: विश्व निवेशक सप्ताह 2025 (World Investor Week 2025) के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय शेयर बाज़ार (National Stock Exchange – NSE) द्वारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के तत्वावधान में आई.टी. गर्ल्स कॉलेज, लखनऊ में एक क्षेत्रीय निवेशक जागरूकता संगोष्ठी (Regional Investor Awareness Seminar – RISA) का आयोजन किया गया।

यह विशेष सत्र महिलाओं में वित्तीय साक्षरता, निवेश के प्रति जागरूकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। संगोष्ठी में छात्राओं को वित्तीय क्षेत्र से संबंधित बुनियादी जानकारी, निवेश के सुरक्षित साधन, और जिम्मेदार आर्थिक निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया गया।
कार्यक्रम का संचालन डा. ई.एस. चार्ल्स (अध्यक्ष), डा. (मेजर) नीरजा मसीह (प्राचार्या) तथा डा. एच.ओ. द्विवेदी (वाणिज्य विभाग के समन्वयक) के कुशल मार्गदर्शन में हुआ। वाणिज्य विभाग द्वारा इस आयोजन को शैक्षणिक और व्यवहारिक दोनों दृष्टियों से छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया।

संगोष्ठी की मुख्य वक्ता सी.एस. श्रुति शर्मा, उत्तर प्रदेश इंचार्ज, रेगुलेटरी विभाग (SEBI) रहीं। उन्होंने वित्तीय साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि —आज के समय में वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि महिलाएँ निवेश के सिद्धांतों और वित्तीय योजनाओं को समझें, तो वे न केवल स्वयं के लिए, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी आर्थिक रूप से मज़बूत आधार तैयार कर सकती हैं।”
उन्होंने निवेश के सुरक्षित विकल्पों, बाजार में पारदर्शिता की आवश्यकता, स्मार्ट इन्वेस्टमेंट प्लानिंग, ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव, और SEBI की निवेशक सुरक्षा पहलों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय साक्षरता केवल पढ़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन कौशल है, जो हर महिला को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाता है।

कार्यक्रम में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए निवेश के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रश्न पूछे। कई छात्राओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह सत्र उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा और इससे उन्हें पैसे के प्रबंधन, बचत के महत्त्व और निवेश के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझने में मदद मिली।
डा. (मेजर) नीरजा मसीह, प्राचार्या, ने संगोष्ठी की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि – “महिलाओं का सशक्तिकरण केवल शिक्षा या रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक साक्षरता भी उसका एक महत्वपूर्ण अंग है। इस प्रकार के सत्र छात्राओं को भविष्य के लिए बेहतर वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं।”
कार्यक्रम के अंत में डा. एच.ओ. द्विवेदी ने मुख्य वक्ता और NSE-SEBI टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया और छात्राओं से अपील की कि वे इस प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में लाएं तथा वित्तीय अनुशासन को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

संगोष्ठी के समापन पर छात्राओं को NSE द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और वाणिज्य विभाग ने भविष्य में ऐसे और सत्र आयोजित करने की घोषणा की।
यह आयोजन न केवल एक जागरूकता कार्यक्रम था, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम भी सिद्ध हुआ।


