पूर्व विधायक को माफी, एक जेल को मिली सजा

जेलों में मोबाइल बरामदगी से अफसरों के दावों की खुली पोल

पूर्व विधायक को माफी, एक जेल को मिली सजा
जिला जेल मुजफ्फरनगर
प्रदेश की दो जेलों में मिले मोबाइल

लखनऊ। प्रदेश की जेलों में मोबाइल फोन के संचालन को लेकर विभागीय अधिकारियों के दावे भले ही कुछ हो लेकिन हकीकत ठीक इसके विपरीत देखने को मिल रही है। दिलचस्प बात तो यह है कि जेल में मोबाइल फोन इस्तेमाल के मामले भी शासन ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है। एक मामले में जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया वहीं दूसरे में पूर्व विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर मामले को रफा दफा कर दिया गया। यह मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है।

पहला मामला गाजीपुर जेल का है। जेल में निरुद्ध बंदी विनोद गुप्ता ने जेल से मोबाइल से कॉल कर किसी को धमकी दी थी। मामले का खुलासा होने के बाद परिक्षेत्र के डीआईजी से इसकी जांच कराई गई। जांच में जेल के अंदर से फोन कॉल करवाने की पुष्टि हुई। घटना की पुष्टि होने पर यह कार्रवाई की गई है। दूसरा मामला मुजफ्फरनगर जेल का है। इस जेल में फर्जी बिल पर माल भेजने और धोखाधड़ी के मुकदमे में पुलिस ने पूर्व विधायक शाहनवाज राणा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल में बंद पूर्व विधायक को जेल के भीतर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया। चेकिंग के दौरान पूर्व विधायक के पास मोबाइल बरामद हुआ। जेल प्रशासन में नई मंडी कोतवाली में पूर्व विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर मामले को रफा दफा कर दिया गया।

निरीक्षण में आईजी जेल ने पकड़ा अवैध वसूली का मामला

मुजफ्फरनगर जेल में मशक्कत और बैठकी के नाम पर जमकर अवैध वसूली की जा रही है। इस सच का खुलासा आईजी जेल के निरीक्षण के दौरान हुआ। निरीक्षण के दौरान शामली जिले के जिजौला गांव निवासी अनीसा नाम की महिला मुलाकाती ने आईजी जेल से शिकायत की उनका देवर मुसव्वर मादक द्रव्यों की आपूर्ति के मामले में जेल में बंद है। उससे गिनती कटवाने के नाम पर 21 हजार रुपए की मांग की जा रही है। आईजी ने महिला से शिकायती पत्र लेकर मेरठ के वरिष्ठ अधीक्षक को जांच का आदेश दिया। जांच रिपोर्ट आने के बाद अवैध वसूली करने वाले पिटीशन रायटर समेत अन्य दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सूत्र बताते है कि गाजीपुर जेल में अवैध पीसीओ संचालन के मामले में परिक्षेत्र के डीआईजी की जांच रिपोर्ट के बाद जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह, जेलर राकेश वर्मा और महिला डिप्टी जेलर को निलंबित कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर मुजफ्फरनगर जेल में पूर्व विधायक को रंगे हाथ मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया। मोबाइल भी बरामद हुआ। इसके बाद भी शासन की ओर से अभी तक जेल के किसी भी अधिकारी और सुरक्षाकर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि विभाग में सेटिंग गेटिंग रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती ही नहीं है।