कारागार विभाग में शासन कर रहा पक्षपातपूर्ण कार्रवाई!
लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में कार्रवाई को लेकर पक्षपात के आरोप फिर से सामने आए हैं। कन्नौज जेल में बंदियों से फर्जी मुलाकात मामले में जेल अधीक्षक को क्लीन चिट दे दी गई, जबकि वाराणसी सेंट्रल जेल में इसी तरह के मामले में अधीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई। सूत्रों के अनुसार, कन्नौज जेल में बंद पूर्व ब्लॉक प्रमुखों नवाब सिंह यादव और नीलू यादव को फर्जी मुलाकातें कराई जा रही थीं। जांच में अनियमितताएं सामने आने के बावजूद दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, वाराणसी जेल में फर्जी मुलाकात के मामले में अधीक्षक समेत कई अधिकारियों को दोषी पाया गया। इस तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से विभागीय निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, पूर्व में भी गलत समयपूर्व रिहाई के प्रस्ताव भेजने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को दंडित करने के बजाय प्रमोशन दिया गया।
| जेलों में बंदियों की फर्जी मुलाकात का मामला |
| कन्नौज में क्लीन चिट तो वाराणसी में हुई विभागीय कार्रवाई |
लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में कार्रवाई को लेकर आए दिन नए नए मामले प्रकाश में आ रहे हैं। शासन और कारागार मुख्यालय की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई ने दोषी अफसरों को बचाकर अधिकारियों का मनोबल बढ़ाने में जुटे हुए है। कार्रवाई नहीं होने से जेल अधिकारी बेलगाम हो गए है। यही वजह कि जेलों में भ्रष्टाचार और अनियमिताएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जेल के अंदर बंदियों की फर्जी मुलाकात के मामले में कन्नौज जेल अधीक्षक को क्लीन चिट तो वाराणसी सेंट्रल जेल अधीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की गई। यह मामला विभागीय अफसरों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक रेप के आरोप में पुलिस ने सपा नेता एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह और उनके गैंगस्टर भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख नीलू यादव को गिरफ्तार कर कन्नौज जेल भेजा था। इन बंदियों के जेल में नियम और कानून को दरकिनार कर धड़ल्ले से फर्जी मुलाकात कराई जा रही थी। इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से की गई। एसपी ने मामले की जांच सीओ सदर कमलेश कुमार को सौंपी। जांच के बाद सीओ ने बताया कि बीती आठ मार्च को जेल में मुलाकात के लिए जिन नामों की पर्ची और जिस बंदी से मुलाकात कराने की लिखापढ़ी मिली। उनसे पूछताछ तो पता चला उस दिन उन बंदियों से कोई मुलाकात करने आया ही नहीं था। इस मुलाकात के लिए जेल की तरफ से उन्हें कोई सूचना दी गई कि उनसे कोई मिलने आया है। जांच में कहा गया है कि इससे स्पष्ट होता है कि जिन बंदियों से कोई मिलने नहीं आता है उनके नाम पर पर्ची लगाकर नवाब सिंह यादव और नीलू यादव की मुलाकात कराई जाती थी। फर्जी तरीके से कराई जा रही इस अवैध मुलाकात का खुलासा होने के बाद दोनों बंदियों की जेल तो बदल दी गई किन्तु अवैध ढंग से मुलाकात कराने वाले किसी भी अधिकारी और कर्मी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। दिलचस्प बात यह है कि कानपुर परिक्षेत्र के प्रभारी डीआईजी ने मामले में दोषी कर्मियों को क्लीन चिट देकर बचा लिया। मामले के बाद अधीक्षक सकुशल सेवानिवृत भी हो गए।
| कारागार विभाग में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है इससे पूर्व कानपुर देहात जेल पर तैनात अधीक्षक राजेंद्र कुमार ने एक सिद्धिदोष महिला बंदी की समयपूर्व रिहाई का गलत प्रस्ताव शासन को भेज दिया। इस मामले में उन्हें निलंबित कर दिया गया। वहीं इससे पूर्व इसी प्रकार की गलती करने वाले वरिष्ठ अधीक्षक प्रेमनाथ पांडे ने नैनी केंद्रीय कारागार पर तैनात रहते हुए सजायाफ्ता कैदी दिनेश कुमार पांडे और फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार में तैनात रहने के दौरान सिद्धदोष कैदी ख़ेम सिंह उर्फ माना पुत्र भारत सिंह के समयपूर्व रिहाई का गलत प्रस्ताव शासन को भेजा था। वरिष्ठ अधीक्षक प्रेमनाथ पांडे के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई करने के बजाए उन्हें डीआईजी पद पर प्रमोशन देने के साथ आगरा के साथ कानपुर रेंज का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है। |
सूत्रों का कहना है कि इससे पूर्व वाराणसी जेल में भी एक दबंग बंदी की दूसरे बंदियों के नाम पर फर्जी मुलाकात कराए जाने का मामला सामने आया था। बताया गया है कि केंद्रीय कारागार वाराणसी में बंद कबूतरा नाम के बंदी से मुलाकात करने गए मुलाकातियों ने अन्य बंदियों से मुलाकात कर ली। इसकी शिकायत होने पर मामले की जांच वाराणसी जेल परिक्षेत्र के डीआईजी को सौंपी गई। डीआईजी ने जांच में जेल अधीक्षक समेत कई अन्य अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए वरिष्ठ अधीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की थी। जबकि कन्नौज जेल मामले में कानपुर परिक्षेत्र के प्रभारी डीआईजी ने किसी भी अधिकारी एवं कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई किए जाने की संस्तुति तक नहीं की।


