जेल अफसरों-बाबुओं ने आईजी को खूब किया गुमराह
मुख्यालय का एक बाबू ने वसूली कर कर रहा जमकर तबादले लंबे समय से एक ही अनुभाग में जमे कई प्रशासनिक अधिकारी
लखनऊ। कारागार महानिरीक्षक के रिटायरमेंट की उल्टी गिनती शुरु हो गई है। सेवानिवृत होने में अब उनके चंद दिन ही शेष बचे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वह जेलों की व्यवस्थाएं सुधारने की बात छोड़िए कारागार मुख्यालय की व्यवस्था तक में कोई सुधार नहीं ला पाए। यह मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। मुख्यालय में पटल परिवर्तन नहीं होने की वजह से एक बाबू ने अपना पूरा कार्यकाल वसूली कर तबादला करने में ही बीता दिया। वह लगातार वसूली कर लगातार तबादले करने में जुटा है। यही नहीं कई बाबुओं ने भी इनके कार्यकाल में अपना दबदबा बनाकर वसूली कर दागदार अफसरों और कर्मियों को खूब लाभ पहुंचाया है।
| पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक कारागार पीवी रामाशास्त्री के लिए शासन का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। मिली जानकारी के मुताबिक बीते दिनों आईजी जेल ने प्रदेश के समस्त जेल परिक्षेत्र के डीआईजी को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया कि परिक्षेत्र में कार्यरत हेड वार्डर, वार्डर जिन्होंने जनपद में तीन और मंडल में सात वर्ष पूरे कर लिए हो इनका स्थानांतरण 24 मई 2025 तक कर दिया जाए। जिन सुरक्षा कर्मियों का तबादला अन्यत्र मंडल में किया जाना हो उसकी सूची मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाए। इसी दौरान 20 मई को विभाग के संयुक्त सचिव शिवगोपाल सिंह ने आईजी जेल को एक पत्र भेजा। इसमें कहा गया कि विभाग के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों के सृजित पदों के सापेक्ष अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती का ब्यौरा 22 मई तक शासन को उपलब्ध कराया जाए। पत्र में निर्देश दिया कि विभाग के समूह क, ख, ग और घ के अधिकारियों और कर्मियों के तबादलों की सूची कारागार मंत्री से विचार विमर्श और उनके अनुमोदन के बाद ही जारी की जाए। दिलचस्प बात यह है कि आईजी जेल ने शासन को मांगी गई सूचनाएं भी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।सूत्रों का कहना है कि शासन के ओर से आईजी जेल को भेजे गए इस पत्र की जानकारी मुख्यालय के विभागाध्यक्ष ने परिक्षेत्र के किसी भी डीआईजी जेल को नहीं दी। जब इसकी पड़ताल के लिए जेल परिक्षेत्र के दो तीन डीआईजी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि आईजी जेल की ओर से सुरक्षा कर्मियों के तबादले 24 मई तक किए जाने का निर्देश तो किया लेकिन शासन की ओर जारी पत्र के वायरल होने की तो उन्हें जानकारी है किंतु इस संबंध में आईजी जेल की ओर से उन्हें इसकी ऑफिशियल कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस संबंध में जब एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। आईजी साहब से बात कर लीजिए। आईजी जेल ने कई प्रयासों के बाद भी फोन नहीं उठाया। |
बीते वर्ष जुलाई माह में पुलिस महानिदेशक पीवी रामा शास्त्री ने कारागार मुख्यालय में बतौर महानिरीक्षक कारागार का प्रभार संभाला था। 31 मई 2025 को डीजी पुलिस/आईजी जेल पीवी रामाशास्त्री सेवानिवृत हो रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि करीब 11 माह के इनके कार्यकाल में प्रदेश की जेलों में जमकर लूट मची रही। मुख्यालय में विभाग की कार्यप्रणाली के कम जानकार अधिकारी होने की वजह से कुछ चापलूस अधिकारियों ने बतौर सलाहकार बनकर इनसे कुछ ऐसे उल्टे सीधे आदेश करा दिए जिससे जेलों में भ्रष्टाचार कम होने के बजाए और बढ़ गया। इससे जेल अधिकारियों की वसूली दो से तीन गुनी हो गई। अधिकारियों ने आईजी जेल को गुमराह कर जमकर वसूली कर खूब जेब भरी। एटा, कन्नौज और फतेहगढ़ जेल इसका जीता जागता उदाहरण बनी।
इसी प्रकार कारागार मुख्यालय में भी कुछ बाबुओं ने आईजी जेल का विश्वासपात्र बनकर उन्हें खूब गुमराह किया। एक बाबू ने इन्हें गुमराह कर अपने चहेते ठेकेदार को ठेका तक दिला दिया। गलती पकड़े जाने के बाद आईजी ने इस बाबू को गोरखपुर जेल परिक्षेत्र कार्यालय भेज दिया। आईजी जेल के कार्यकाल में कुछ बाबुओं के पटल परिवर्तन तो किए गए लेकिन लंबे समय से एक ही अनुभाग में डेरा जमाए प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ सहायक एक भी बाबू को हटाया नहीं गया। बताया गया है कि एक बाबू ने तो अपना अधिकांश कार्यकाल वसूली कर तबादला करने में ही बीता दिया। बीते करीब 15-20 साल से एक ही पटल पर जमे बाबू ने पहले फार्मासिस्ट, जेलर/अधीक्षकों के तबादलों में जमकर वसूली की। वर्तमान समय में इस बाबू के हाथ में डिप्टी जेलर संवर्ग के तबादलों की कमान है। स्थानांतरण सत्र चलने की वजह से यह बाबू डिप्टी जेलरों से लाखों रुपए की मोटी रकम वसूल कर उन्हें मनमाफिक कमाऊ जेलों पर भेजने की फ़िराख में जुटा हुआ है। इसी प्रकार लीगल सेल में लगे बाबू को प्रमोशन के बाद भी विधि प्रकोष्ठ का प्रभार दे रखा गया है। एक प्रशासनिक अधिकारी (बाबू) तो घूम फिरकर गोपनीय अनुभाग में ही बना हुआ है। इसको कुछ दिनों के लिए अनुभाग से हटाने के बाद भी फिर से गोपनीय अनुभाग का प्रभार सौंप दिया गया है। हकीकत यह है कि विभाग को कार्यप्रणाली से अनभिज्ञ आईजी जेल को गुमराह कर जेल अधिकारी और बाबू अपनी जेब भरने में जुटे रहे।


