राजस्व का चुना लगाने वाले जेल अफसरों पर शासन मेहरबान!
रेट वेरिफिकेशन कराए बगैर कर दिया लाखों का भुगतान बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर खरीदा गया रॉ मैटेरियल आदर्श कारागार के प्रभारी अधीक्षक का कारनामा
लखनऊ। प्रदेश कारागार विभाग की महिमा अपरंपार है। इस विभाग में लाखों रुपए सरकारी राजस्व का चुना लगाने वाले जेल अफसरों पर शासन मेहरबान है। विभाग में अधिकारी अपने साथी अधिकारी तक की बात नहीं मानते है। यही वजह है कि एक अधीक्षक ने रेट वेरिफिकेशन कराकर भुगतान करने का निर्देश के बाद भी दूसरे अधीक्षक ने निर्देशों को दर किनार कर ठेकेदार को लाखों रुपए का भुगतान कर दिया। नौ की लकड़ी नब्बे खर्च के नाम हुए भुगतान का यह मामला जेलकर्मियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजधानी की आदर्श कारागार प्रदेश की एकमात्र जेल है जहां प्रदेश भर की जेलों से चयनित फर्स्ट अफेंडर कैदियों को ही रखा जाता है। इस जेल में कैदियों के पुनर्वास के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है। इसके तहत जेल में प्रिंटिंग प्रेस, पावरलूम, सिलाई, बेकरी सरीखे कई उद्योग संचालित किए जा रहे है। इनमें काम करके कैदी विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन कर पारिश्रमिक हासिल करते है। इससे वह स्वावलंबी बनने के साथ घर तक का खर्च चलाते है। कैदी पुनर्वास की यह योजना जेल अधिकारियों की कमाई का जरिया बनकर रह गई है।
शासन की लचर व्यवस्था से बेखौफ हुए जेल अफसर!
शासन और कारागार मुख्यालय में बैठे आला अफसरों के कार्रवाई नहीं किए जाने से जेल अधिकारी बेखौफ हो गए है। बीते दोनों आदर्श कारागार में तैनात प्रशिक्षक की दो डिप्टी जेलरों ने पिटाई कर दी। इस मामले में शिकायतकर्ता प्रशिक्षक को ही हटाकर मामले को रफा दफा कर दिया गया। इसी प्रकार लखनऊ जिला जेल में अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों ने लूट मचा रखी है। कैंटीन का ठेका 30 लाख में उठने और राशन में हो रही बेतहाशा कटौती कर जमकर अवैध वसूली की जा रही है। कार्रवाई नहीं होने से अधिकारी बेखौफ होकर वसूली करने में जुटे हुए हैं। जेल में मशक्कत और बैठकी के नाम पर भी अनाप शनाप वसूली की जा रही है।
आदर्श कारागार में संचालित उद्योगों के लिए ठेकेदारों के माध्यम से रा मटेरियल मसलन प्रिंटिंग इंक, ग्रीस, मोबाइल ऑयल, बैंडिंग क्लॉथ, अबरी पेपर, दफ्ती, कपड़े सिलने का धागा सरीखे तमाम आइटमों की आपूर्ति कराई जाती है। सूत्रों का कहना है कि इन आइटमों की खरीद बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर की जा रही है। मसलन बाजार में 25 रुपए मीटर मिलने वाला वाइंडिंग क्लॉथ 65 से 75 रुपए मीटर खरीदा जा रहा है। इसी प्रकार 600 रुपए में मिलने वाला अबरी पेपर 2500 रुपए में, 12 रुपए में मिलने वाला कपड़ा सिलने वाला धागा 36 रुपए में एवं प्रिटिंग प्रेस के लिए आने वाले आइटमों को बाजार से 50 से 75 प्रतिशत अधिक दामों पर आपूर्ति कराई जा रही है। बेतहाशा दामों पर हो रही इस आपूर्ति की शिकायत मिलने पर पूर्व जेल अधीक्षक ने रेट वेरिफिकेशन कराने की बात कहकर भुगतान को रोक दिया था। यह निर्देश फाइलों में भी दर्ज कर दिया था। इस दौरान उनका तबादला कर दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि पूर्व अधीक्षक के निर्देश के बाद भी प्रभारी जेल अधीक्षक ने ठेकेदारों के आपूर्ति किए गए सामनों के रेट का वेरिफिकेशन नहीं कराया है। बगैर रेट वेरिफिकेशन कराए ठेकेदारों के बाजार से दो से तीन गुना अधिक दामों पर आपूर्ति किए गए सामनों के लिए कई ठेकेदारों का लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया है। कुछ ऐसा ही हाल लखनऊ जेल का भी है। सरकार के राजस्व को लाखों रुपए चुना लगाने वाले अफसरों के इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। उधर इस संबंध में आदर्श कारागार का कोई भी अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचता नजर आया।


