बगैर प्रशिक्षण अपरिपक्व से परिपक्व हो गए जेल अधीक्षक!

फतेहगढ़ जेल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां अपरिपक्व बताकर हटाए गए अधीक्षक को बिना प्रशिक्षण के ही परिपक्व मानते हुए नया प्रभार सौंप दिया गया। रायबरेली जेल से हटाकर फतेहगढ़ सेंट्रल जेल पर अस्थाई ड्यूटी पर भेजे गए अधीक्षक अमन कुमार सिंह को बिना प्रशिक्षण के ही फतेहगढ़ जिला जेल की जिम्मेदारी सौंप दी गई, जबकि उन्हें आहरण वितरण का अधिकार तक नहीं दिया गया है। विभागीय गलियारों में यह निर्णय चर्चा और सवालों का विषय बना हुआ है, वहीं सूत्र इसे राजनीतिक सिफारिश और ऊंची पहुंच का नतीजा मान रहे हैं।

बगैर प्रशिक्षण अपरिपक्व से परिपक्व हो गए जेल अधीक्षक!
कारागार मुख्यालय
मंत्री प्रोटोकॉल का अनुपालन न करने पर हटाए गए थे अधीक्षक
आईजी जेल ने फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में लगाई गई थी अस्थाई ड्यूटी
प्रभार सौंपने के बाद अधीक्षक को अभी तक नहीं दिया गया आहरण वितरण
आईजी ने सजा के बजाय सौंप दी फतेहगढ़ जिला जेल की कमान

लखनऊ। महानिरीक्षक कारागार (आईजी) ने जिस जेल अधीक्षक को अधिकारियों/कर्मचारियों पर शिथिल नियंत्रण और अधीक्षक के दायित्वों के निर्वहन में अपरिपक्व बताते हुए फतेहगढ़ सेंट्रल जेल पर अस्थाई ड्यूटी लगाई थी। वह अधीक्षक अस्थाई ड्यूटी पर गए बगैर और बिना किसी प्रशिक्षण प्राप्त किए ही परिपक्व हो गया। यह बात पढ़ने और सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन कारागार विभाग के अधिकारियों ने इसे सच साबित कर दिया है। विभाग के विभागाध्यक्ष ने जिस अधीक्षक को प्रशिक्षण के लिए अस्थाई ड्यूटी पर लगाया था उसी को बगैर प्रशिक्षण के ही फतेहगढ़ जिला जेल का प्रभार सौंप दिया।मजे के बात यह है कि अस्थाई ड्यूटी पर लगाए गए अधीक्षक को अभी तक आहरण वितरण का प्रभार नहीं दिया गया है। यह मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ऊंची पहुंच और जुगाड़ वाले अधिकारियों के लिए विभाग में कोई नियम और कानून नहीं है। उधर विभाग के आला अफसर इस गंभीर मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

रायबरेली जेलर को सजा के बजाए मिला तोहफा!
कारागार विभाग के आला अफसर घटनाएं होने के बाद दोषी अधिकारियों को दंडित करने के बजाए बचा रहे है। यही वजह है कि अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। इन अधिकारियों में कार्यवाही का भय ही खत्म हो गया है। रायबरेली जेल पर तैनात जेलर हिमांशु रौतेला प्रदेश के बहुचर्चित शाइन सिटी मामले की जांच के दौरान सुर्खियों में रहे। शाइन सिटी की पावर ऑफ अटॉर्नी जेल के बाहर जाने के मामले में जांच अधिकारी लखनऊ परिक्षेत्र के तत्कालीन डीआईजी ने जेलर को दोषी ठहराते हुए इनके निलंबन और विभागीय कार्रवाई करने की संस्तुति की थी। इस जांच रिपोर्ट के बाद शासन और मुख्यालय ने दोषी जेलर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्हें प्रमोशन दे दिया। बीते दिनों रायबरेली जेल में आत्महत्या की घटना के मामले में भी जेलर को बचा लिया गया। ऐसा तब किया गया जब जेल में बंदियों पर नियंत्रण रखने की पूरी जिम्मेदारी जेलर की होती है। यह तो बानगी है इसी प्रकार दर्जनों घटनाओं में विभाग के उच्चाधिकारियों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उन्हें बचा लिया।

मिली जानकारी के मुताबिक बीती पांच फरवरी 2025 को महानिरीक्षक कारागार पीवी रामाशास्त्री ने रायबरेली जेल के तत्कालीन अधीक्षक अमन कुमार सिंह को जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिथिल नियंत्रण होने तथा अधीक्षक पद के दायित्वों के निर्वहन में अपरिपक्व होने की बात कहकर रायबरेली जेल से हटाकर उन्हें फतेहगढ़ सेंट्रल जेल पर अस्थाई ड्यूटी पर लगाया था।आईजी जेल ने गंभीर आरोपों से घिरे होने के बाद भी रायबरेली के तत्कालीन जेल अधीक्षक को स्थाई रूप से हटाने के बजाए उन्हें प्रशिक्षण के लिए सेंट्रल जेल फतेहगढ़ में खाली पड़े अधीक्षक के पद पर तीन माह के लिए अस्थाई ड्यूटी पर भेजा था। 

सत्तारूढ़ पार्टी की कद्दावर नेता की सिफारिश पर बदली जेल!
रायबरेली जिला जेल से फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेजे गए अधीक्षक की जेल यूं ही नहीं बदल दी गई। सूत्रों का कहना है कि जेल प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे नवनियुक्त अधीक्षक को अच्छी जेल पर तैनाती देने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी की कद्दावर नेता के इशारे पर रायबरेली जेल को होल्ड पर रखा गया था। प्रशिक्षण के उपरांत नवनियुक्त अधीक्षक को इस जेल पर तैनात किया गया। कुछ माह बाद ही मंत्री के प्रोटोकॉल का अनुपालन नहीं करने पर पर उन्हें अधीक्षक के दायित्वों का निर्वहन करने में अपरिपक्व बताते हुए हटाकर फतेहगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया। सूत्रों की माने तो सत्तारूढ़ पार्टी की कद्दावर नेता की सिफारिश पर नवनियुक्त अधीक्षक को सेंट्रल जेल से हटाकर फतेहगढ़ जिला जेल पर लगा दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि प्रशिक्षण के लिए अस्थाई ड्यूटी पर भेजे गए अधीक्षक फतेहगढ़ सेंट्रल जेल पर चंद दिनों तक ही रहे। इस दौरान न तो उन्हें कोई प्रशिक्षण दिया गया और न ही उनसे कोई कार्य कराया गया। आईजी जेल के अधीक्षक पद के दायित्वों का निर्वहन में अपरिपक्व बताए जाने वाले इस जेल अधीक्षक को मार्च माह में आईजी जेल ने सेंट्रल जेल फतेहगढ़ से जिला जेल फतेहगढ़ जेल पर अस्थाई ड्यूटी पर लगा दिया। दिलचस्प बात यह है कि बगैर किसी प्रशिक्षण के अपरिपक्व से परिपक्व हुए अधीक्षक को आहरण वितरण का प्रभार नहीं दिया गया है। फतेहगढ़ जेल का प्रभार संभाल रहे अधीक्षक के पास आहरण वितरण का प्रभार नहीं होन से उन्हें जेल के संचालन में तमाम तरह को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। जबकि फतेहगढ़ की सेंट्रल और जिला जेल का आहरण वितरण सेंट्रल जेल अधीक्षक के पास ही है। आईजी जेल के आदेश बदलने की यह मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि ऊंची पहुंच और जुगाड़ वाले अधिकारियों के लिए विभाग में नियम और कानून का कोई मायने नहीं रह गया है। यही वजह है कल जिस अधीक्षक को आईजी जेल ने अपरिपक्व बताते हुए हटाया था फिर उसी को परिपक्व मानते हुए फतेहगढ़ जेल का प्रभार सौंप दिया गया। इस संबंध में जब आईजी जेल पी वी रामाशास्त्री से संपर्क करने का प्रयास किया गया कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।